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बिहार से तेलंगाना तक साइबर ठगी का नेटवर्क उजागर, सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को बनाया जा रहा था निशाना

बिहार से तेलंगाना तक फैले साइबर ठगी के एक नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। जांच में सामने आया
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बिहार से तेलंगाना तक फैले साइबर ठगी के एक नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधियों का यह गिरोह सरकारी योजनाओं और विभिन्न लाभकारी सेवाओं के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहा था। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।

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    पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, साइबर ठग लोगों को सरकारी सहायता, योजना का लाभ या अन्य सुविधाएं दिलाने का झांसा देकर उनसे संपर्क करते थे। बातचीत के दौरान आरोपियों द्वारा लोगों से व्यक्तिगत और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती थी। इसके बाद इसी जानकारी का इस्तेमाल आर्थिक धोखाधड़ी के लिए किया जाता था।

    जांच एजेंसियों को इस नेटवर्क के बिहार और तेलंगाना से जुड़े होने की जानकारी मिलने के बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ाया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में किस तरह एक-दूसरे के संपर्क में थे और साइबर ठगी से हासिल रकम को किस तरीके से इधर-उधर किया जाता था।

    पुलिस ने कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है ताकि नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके। जांचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कई अन्य लोग जुड़े हुए थे।

    साइबर अपराधियों द्वारा सरकारी योजनाओं का नाम इस्तेमाल करना पुलिस के लिए भी एक महत्वपूर्ण जांच बिंदु है। आम लोगों के बीच सरकारी योजनाओं को लेकर भरोसा होने का फायदा उठाकर अपराधी उन्हें फोन, मैसेज या अन्य डिजिटल माध्यमों से संपर्क कर सकते हैं। कई मामलों में लोगों को बताया जाता है कि उन्हें किसी योजना का लाभ मिलने वाला है और इसके लिए उन्हें दस्तावेज, बैंक खाता या अन्य जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

    जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस गिरोह ने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया। इसके लिए संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी से हासिल रकम किन खातों में पहुंची और उसे आगे कहां भेजा गया।

    साइबर ठगी के मामलों में डिजिटल लेनदेन की कड़ी को ट्रैक करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। एक खाते से दूसरे खाते में रकम भेजकर या अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल करके अपराधी पैसों का वास्तविक स्रोत छिपाने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के साथ-साथ वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

    बिहार में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में लगातार नए तरीके सामने आते रहे हैं। सरकारी अधिकारी या सरकारी योजना का नाम लेकर लोगों से जानकारी मांगना साइबर ठगों के आम तरीकों में शामिल है। ऐसे मामलों में अपराधी अपने आपको सरकारी कर्मचारी या किसी अधिकृत संस्था का प्रतिनिधि बताकर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के नाम पर यदि कोई व्यक्ति फोन करके बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, एटीएम या कार्ड से जुड़ी संवेदनशील जानकारी मांगे तो उसे साझा न करें। किसी भी योजना की वास्तविक जानकारी संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय से ही प्राप्त करनी चाहिए।

    जांच के दौरान पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपी के पास से कोई डिजिटल उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज या अन्य ऐसा सामान मिला है या नहीं जिससे गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिल सके। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

    बिहार से तेलंगाना तक फैले इस कथित साइबर नेटवर्क का खुलासा एक बार फिर यह दिखाता है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं रह गई है। अलग-अलग राज्यों में बैठे अपराधी डिजिटल माध्यम से लोगों को निशाना बना सकते हैं और ठगी की रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित कर सकते हैं।

    पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास जारी है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था, कितने लोगों को निशाना बनाया गया और इसमें कितने अन्य लोग शामिल हैं। पुलिस की कार्रवाई का अगला चरण नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी पर केंद्रित रहने की संभावना है।

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