Last updated: August 19th, 2026 at 02:42 pm

रांची में लंबे समय से चल रहा छात्रों का आंदोलन फिलहाल टल गया है। जेपीएससी स्टेडियम में 25 जुलाई से धरने पर बैठे छात्रों ने आंदोलन को दो महीने के लिए स्थगित करने का फैसला किया है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों ने झारखंड सरकार को 60 दिनों का समय देते हुए साफ कर दिया है कि इस अवधि में उनकी प्रमुख मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से कराने की है। छात्रों का कहना है कि सरकार को इस मांग पर कार्रवाई के लिए 60 दिन का समय दिया गया है।
सरकार ने कई परीक्षाओं पर लिया फैसला
झारखंड सरकार ने सीआईडी जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर 22 परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा छह परीक्षाओं की प्रक्रिया को स्थगित किया गया है, जबकि 17 अन्य परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की बात कही गई है।
सरकार की इस कार्रवाई के बाद छात्रों ने फिलहाल आंदोलन रोकने का फैसला किया है, लेकिन उनका कहना है कि सिर्फ परीक्षाएं रद्द करना पर्याप्त नहीं है। वे कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच चाहते हैं।
JSSC CGL रद्द होने के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों का प्रदर्शन
इसी बीच, JSSC CGL परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ सफल और नवनियुक्त अभ्यर्थियों ने भी विरोध प्रदर्शन किया। 18 अगस्त की रात बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक मार्च निकाला और सरकार से परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने वर्षों की तैयारी और अपनी योग्यता के आधार पर परीक्षा में सफलता हासिल की है। ऐसे में पूरी परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने से उन अभ्यर्थियों को नुकसान होगा, जिन्होंने निष्पक्ष तरीके से परीक्षा पास की है।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उनका कहना था कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करना उचित समाधान नहीं है।
अब छात्रों के आंदोलन पर अगले 60 दिनों तक सरकार की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि इस अवधि में सीबीआई जांच की मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलनकारी छात्र फिर से सड़कों पर उतरने की चेतावनी दे चुके हैं।
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