Last updated: August 26th, 2026 at 07:08 am

अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर प्रस्तावित नए नियमों ने भारतीय IT प्रोफेशनल्स, कंपनियों और अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों के बीच चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की ओर से प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ नई H-1B याचिकाओं पर $103,265 तक का शुल्क लगाया जा सकता है।
यह प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं है। 24 अगस्त को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित नोटिस पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं। ऐसे में अंतिम नियम आने तक शुल्क और उसके दायरे में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
नई H-1B याचिका पर भारी शुल्क का प्रस्ताव
प्रस्तावित व्यवस्था में सालाना H-1B कैप के अंतर्गत आने वाली नई याचिकाओं पर अमेरिकी नियोक्ताओं के लिए $103,265 का अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित किया गया है। भारतीय कर्मचारियों को बड़ी संख्या में अमेरिका भेजने वाली IT कंपनियों के लिए यह बदलाव खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अगर यह प्रस्ताव मौजूदा स्वरूप में लागू होता है, तो किसी विदेशी कर्मचारी को अमेरिका में नियुक्त करने या H-1B के जरिए लाने की लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
H-1B और L-1 एक्सटेंशन पर भी अतिरिक्त शुल्क
नई H-1B याचिकाओं के अलावा कुछ बड़ी कंपनियों के कर्मचारियों के वीजा एक्सटेंशन पर भी अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान सामने आया है। प्रस्ताव के अनुसार, ऐसी कंपनियां जिनके 50 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी H-1B या L-1 जैसे वीजा पर हैं, उन्हें निर्धारित परिस्थितियों में H-1B एक्सटेंशन के लिए $4,000 और L-1 एक्सटेंशन के लिए $4,500 का अतिरिक्त सरचार्ज देना पड़ सकता है।
यह प्रावधान भारतीय IT सर्विस कंपनियों के लिए खास मायने रखता है, क्योंकि इन कंपनियों का अमेरिका में बड़ा तकनीकी कार्यबल वीजा आधारित रोजगार व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
भारतीय IT कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका
TCS, Infosys, Wipro और HCLTech जैसी भारतीय IT कंपनियां लंबे समय से भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों को अमेरिकी क्लाइंट्स के प्रोजेक्ट्स पर भेजती रही हैं। नए शुल्क लागू होने पर कर्मचारियों को अमेरिका भेजने और उनके वीजा से जुड़ी प्रक्रियाओं की लागत काफी बढ़ सकती है।
ऐसे में कंपनियां अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाने, भारत से रिमोट तरीके से प्रोजेक्ट संचालित करने या दूसरे देशों में अपने ऑपरेशनल बेस को मजबूत करने जैसे विकल्पों पर ज्यादा जोर दे सकती हैं।
भारतीय छात्रों के लिए भी बढ़ सकती है चुनौती
H-1B व्यवस्था का असर केवल अनुभवी IT प्रोफेशनल्स तक सीमित नहीं है। अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए भी इसका महत्व काफी अधिक है। पढ़ाई पूरी करने के बाद कई विदेशी छात्र OPT के जरिए अमेरिका में काम का अनुभव हासिल करते हैं और आगे H-1B वीजा पाने की कोशिश करते हैं।
यदि कंपनियों के लिए विदेशी छात्रों को H-1B स्पॉन्सर करना बहुत महंगा हो जाता है, तो खासकर छोटी और मध्यम कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को नौकरी देने से बच सकती हैं। इससे अमेरिकी डिग्री के बाद भारतीय छात्रों के लिए रोजगार और वीजा स्पॉन्सरशिप हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
OPT पर भी बड़े शुल्क का प्रस्ताव
विदेशी छात्रों के लिए उपलब्ध Optional Practical Training यानी OPT व्यवस्था भी प्रस्तावित बदलावों के दायरे में है। रिपोर्ट के मुताबिक, OPT पर $100,000 तक के अतिरिक्त शुल्क को लेकर भी प्रस्ताव सामने आया है।
हालांकि, H-1B शुल्क और OPT से जुड़े प्रस्तावों को एक ही नियम के तहत अंतिम रूप दिया जाएगा या नहीं, यह आगे की प्रक्रिया और सरकारी फैसलों पर निर्भर करेगा।
कंपनियां बदल सकती हैं भर्ती रणनीति
अगर प्रस्तावित शुल्क लंबे समय तक लागू रहता है, तो अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने से पहले उनकी विशेषज्ञता और भूमिका को ज्यादा ध्यान से देख सकती हैं। सामान्य तकनीकी पदों की तुलना में बेहद विशिष्ट कौशल वाले कर्मचारियों के लिए H-1B स्पॉन्सरशिप को प्राथमिकता मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
इसका एक असर यह भी हो सकता है कि कंपनियां अमेरिका में स्थानीय प्रतिभाओं की भर्ती बढ़ाएं और उन कामों को भारत जैसे देशों से रिमोट या ऑफशोर मॉडल के जरिए संचालित करें, जिनके लिए कर्मचारी का अमेरिका में मौजूद रहना जरूरी नहीं है।
अभी अंतिम फैसला बाकी
H-1B और OPT से जुड़े ये प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं हैं। सार्वजनिक टिप्पणियों की प्रक्रिया पूरी होने और प्रशासन की ओर से अंतिम फैसला लिए जाने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन से प्रावधान किस रूप में लागू होते हैं।
फिलहाल प्रस्ताव ने भारतीय IT सेक्टर और अमेरिका में करियर बनाने की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच बहस जरूर तेज कर दी है। यदि भारी शुल्क लागू होता है, तो इसका असर अमेरिकी कंपनियों की भर्ती नीति, भारतीय IT सेवाओं और विदेशी छात्रों के रोजगार विकल्पों पर पड़ सकता है।
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