Last updated: August 29th, 2026 at 09:27 am

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के बैरिस्टर इफ़्तिख़ार अली गिलानी को क्षेत्र की विधानसभा में ‘प्रधानमंत्री’ चुना गया है। उनका चुनाव ऐसे समय हुआ है, जब हालिया चुनावों को लेकर हिंसा और कथित धांधली के आरोपों के बीच राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
गिलानी को मिले 30 वोट
मुज़फ़्फ़राबाद में हुई विधानसभा की बैठक के दौरान इफ़्तिख़ार अली गिलानी ने 44 में से 30 वोट हासिल किए। उनके मुकाबले पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के मुख्तार अहमद को 14 वोट मिले।
विधानसभा की कुल स्वीकृत संख्या 53 है, लेकिन फिलहाल 46 सदस्य हैं। पूंछ और सुधनोती जिलों की सात सीटों पर चुनाव नहीं हो सके हैं। अधिकारियों ने इसके पीछे कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों को वजह बताया है।
मतदान में सभी विधायक शामिल नहीं हुए
शुक्रवार को हुए मतदान में 44 विधायकों ने हिस्सा लिया। विधानसभा अध्यक्ष ने मतदान नहीं किया, जबकि PML-N के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर पार्टी के साथ मतभेदों के चलते सदन की बैठक में मौजूद नहीं रहे। इससे एक दिन पहले PML-N प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने इफ़्तिख़ार अली गिलानी को इस पद के लिए नामित किया था।
आम चुनाव में हार के बाद आरक्षित सीट से पहुंचे विधानसभा
गिलानी की राजनीतिक स्थिति भी इस पूरे घटनाक्रम में चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने जिस सामान्य सीट से प्रत्यक्ष चुनाव लड़ा था, वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह टेक्नोक्रेट के लिए आरक्षित सीट से विधानसभा पहुंचे। PoK विधानसभा में 53 सीटें हैं। इनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि आठ सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित हैं।
PML-N के पास बहुमत का दावा
सीधे चुनाव वाली 45 सीटों में से अब तक PML-N ने 38 निर्वाचन क्षेत्रों में 25 सीटें जीती हैं। PPP के खाते में 12 सीटें गई हैं, जबकि अवामी दस्त-ओ-बाज़ू पार्टी ने एक सीट जीती और PML-N का समर्थन किया। वहीं, आठ आरक्षित सीटों में PML-N को छह और PPP को दो सीटें मिली हैं।
JAAC के विरोध के बीच गिलानी की ताजपोशी
PoK में जून की शुरुआत से ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की मौत की भी खबरें सामने आई हैं। क्षेत्रीय सरकार ने जून में इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया था।
JAAC शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों की व्यवस्था का विरोध करता रहा है। ऐसे में सामान्य सीट पर हारने के बाद आरक्षित सीट से विधानसभा पहुंचने वाले गिलानी का प्रधानमंत्री चुना जाना राजनीतिक विवाद को और बढ़ा सकता है।
भारत का क्या रुख है?
भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अपना अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा मानता है। नई दिल्ली का लगातार कहना रहा है कि पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है।
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