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नेपाल की बाढ़ का खौफनाक असर, कुशीनगर में गंडक नदी से 13 शव बरामद; चार शवों का आज होगा पोस्टमार्टम

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय का असर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में लगातार दिखाई दे रहा है।
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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय का असर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में लगातार दिखाई दे रहा है। कुशीनगर जिले में गंडक नदी के रास्ते अब तक 13 शव बरामद किए जा चुके हैं। प्रशासन के अनुसार ये शव नेपाल में आई आपदा के बाद नदी के तेज बहाव में बहकर भारतीय क्षेत्र में पहुंचे हैं। सोमवार को उन चार शवों का पोस्टमार्टम कराया जाना है, जिनकी 72 घंटे की निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है।

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    कुशीनगर में गंडक नदी पर प्रशासन और एसडीआरएफ की निगरानी लगातार जारी है। रविवार को भी नदी में चार और शव दिखाई दिए, जिसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने उन्हें बाहर निकाला। इनमें दो पुरुष और दो महिलाओं के शव शामिल बताए गए हैं। इन्हें आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया।

    अधिकारियों के मुताबिक, कुशीनगर में पिछले चार दिनों में कुल 13 शव बरामद हुए हैं। इनमें से कई शवों की हालत काफी खराब है और अब तक किसी की पहचान नहीं हो सकी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचाना है। नेपाल में बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, इसलिए भारतीय और नेपाली अधिकारियों के बीच पहचान को लेकर समन्वय किया जा रहा है।

    नियमों के अनुसार अज्ञात शवों को पहचान के लिए निर्धारित अवधि तक मोर्चरी में रखा जाता है। कुशीनगर मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखे चार शवों की 72 घंटे की अवधि रविवार रात पूरी हो गई। इसके बाद सोमवार को उनका पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम के दौरान डीएनए सैंपल भी सुरक्षित किए जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी, ताकि भविष्य में नेपाल या भारत से किसी परिवार द्वारा दावा किए जाने पर वैज्ञानिक तरीके से पहचान की जा सके।

    कुशीनगर में मोर्चरी की क्षमता पर भी दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ शवों को गोरखपुर एम्स की मोर्चरी में भी रखा गया है। प्रशासन शवों को बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने से बचने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि इससे शवों के खराब होने की संभावना बढ़ सकती है। इसी वजह से कुछ शवों का पोस्टमार्टम गोरखपुर में कराने पर भी विचार किया जा रहा है।

    गंडक नदी में शवों के साथ नेपाल से बहकर आए दूसरे सामान भी दिखाई दे रहे हैं। नदी किनारे वाहन, घरेलू सामान, गैस सिलेंडर, ड्रम, लकड़ी और अन्य मलबा मिलने की जानकारी सामने आई है। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग नदी किनारे इन सामानों को देखने और निकालने के लिए पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी में उतरने या बहकर आए सामान को स्वयं निकालने से बचने की अपील की है।

    महराजगंज जिले में भी नेपाल से बहकर आए शव बरामद किए गए हैं। वहां मिले चार शवों का पोस्टमार्टम और डीएनए सैंपलिंग पूरी करने के बाद उन्हें नेपाल प्रशासन को सौंप दिया गया है। अधिकारियों ने शवों को भारत-नेपाल सीमा पर नेपाली प्रशासन को सौंपने से पहले आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कीं।

    महराजगंज और कुशीनगर में शवों की बरामदगी ने सीमा के दोनों तरफ लापता लोगों के परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। नेपाल में आपदा के बाद कई परिवार अपने परिजनों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में बरामद शवों के डीएनए नमूने भविष्य में पहचान की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच इस संबंध में जानकारी साझा की जा रही है।

    कुशीनगर प्रशासन ने गंडक नदी और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासनिक टीमें नदी के किनारे लगातार नजर रख रही हैं। अधिकारियों का उद्देश्य एक तरफ नदी में बहकर आने वाले शवों और सामानों को सुरक्षित तरीके से निकालना है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों को तेज बहाव और संभावित जोखिम से दूर रखना भी है।

    नेपाल में हुई इस आपदा का प्रभाव केवल नेपाल तक सीमित नहीं रहा है। नदी के प्राकृतिक प्रवाह के कारण बड़ी मात्रा में मलबा और शव भारत के सीमावर्ती जिलों तक पहुंच रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच आपदा प्रबंधन और सीमा-पार समन्वय की आवश्यकता भी सामने आई है।

    नेपाल की भीषण बाढ़ के बाद गंडक नदी के रास्ते कुशीनगर में अब तक 13 शव बरामद किए जा चुके हैं। चार शवों की 72 घंटे की अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। महराजगंज में मिले चार शवों का डीएनए सैंपल लेने के बाद उन्हें नेपाल प्रशासन को सौंप दिया गया है। प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें गंडक नदी पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

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