Last updated: August 31st, 2026 at 11:29 am

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बिहार में प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। राज्य सरकार ने गंडक, कोसी और अन्य नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, जिला प्रशासन, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखी गई हैं।
नेपाल में ग्लेशियर धंसने और लगातार बारिश के कारण कई नदियों में जलप्रवाह अचानक बढ़ गया। इसका असर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों पर भी पड़ने लगा है। बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और शिवहर जैसे जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों को तटबंधों की सुरक्षा, निचले इलाकों की निगरानी और राहत तैयारियों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए वाल्मीकिनगर बैराज पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी लगातार पानी के प्रवाह का आकलन कर रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए सतर्कता कम नहीं की जाएगी।
राज्य सरकार ने संवेदनशील जिलों में राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। कई स्थानों पर नावों की व्यवस्था की गई है, राहत शिविरों की पहचान कर ली गई है और सामुदायिक रसोई शुरू करने की तैयारी भी रखी गई है। स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी गांव में पानी प्रवेश करने की आशंका हो तो लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं। बिहार के संवेदनशील जिलों में राहत दलों की तैनाती की गई है, जबकि अतिरिक्त टीमें आवश्यकता पड़ने पर तुरंत भेजने की व्यवस्था रखी गई है। बचाव उपकरण, लाइफ जैकेट, मोटरबोट और अन्य संसाधनों को भी तैयार रखा गया है।
नेपाल में आई आपदा का असर केवल जलस्तर तक सीमित नहीं है। गंडक नदी के रास्ते कई स्थानों पर मलबा और शव बहकर भारत पहुंचने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इस कारण सीमा से लगे जिलों में पुलिस और प्रशासन को अतिरिक्त सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी आवश्यक तैयारियां रखने के लिए कहा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी वर्षा या ग्लेशियर संबंधी घटनाओं का असर कुछ ही घंटों में बिहार की नदियों पर दिखाई दे सकता है। इसलिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग और दोनों देशों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें। नदी किनारे रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है। साथ ही बच्चों को नदी के किनारे न जाने और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की हिदायत दी गई है।
बिहार में बड़े पैमाने पर बाढ़ की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन नेपाल में जारी आपदा को देखते हुए सरकार किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहती। जलस्तर, मौसम और नदी के प्रवाह की लगातार निगरानी की जा रही है। यदि स्थिति बदलती है तो प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया जाएगा।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार में हाई अलर्ट जारी है। गंडक और कोसी समेत कई नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। संवेदनशील जिलों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं, जबकि प्रशासन ने राहत शिविर, नावों और अन्य संसाधनों की तैयारी पूरी रखने के निर्देश दिए हैं।
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