Last updated: August 31st, 2026 at 11:33 am

पटना: बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जाति आधारित राजनीति को लेकर विपक्षी नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि समाज को जातीय विभाजन से ऊपर उठकर विकास, समान अवसर और सामाजिक समरसता के मुद्दों पर आगे बढ़ना चाहिए। मंत्री ने नेताओं के कामकाज और उपलब्धियों को लेकर जनता से सवाल करने की भी अपील की।
जातीय विभाजन की राजनीति पर साधा निशाना
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इतिहास में सामाजिक विभाजन का देश को नुकसान उठाना पड़ा है। उनके मुताबिक, संविधान निर्माताओं ने सभी नागरिकों को समान अवसर देने की व्यवस्था की, लेकिन इसके बावजूद कुछ राजनीतिक ताकतें आज भी जाति के आधार पर समाज को बांटने की कोशिश करती हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य किसी एक जाति या समुदाय तक सीमित नहीं होना चाहिए। एक नेता को हर वर्ग के लोगों के समर्थन से ही जनप्रतिनिधित्व हासिल होता है।
नेताओं के काम पर जनता मांगे जवाब
कृषि मंत्री ने कहा कि जनता को राजनीतिक नेताओं से उनके योगदान को लेकर सवाल पूछना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताओं से यह पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने समाज और राज्य के विकास के लिए क्या काम किया और उनके कार्यकाल की ऐसी कौन-सी उपलब्धियां हैं, जिन पर जनता गर्व कर सके।
उनके मुताबिक, राजनीतिक नेतृत्व की कसौटी जातिगत पहचान नहीं, बल्कि जनहित में किए गए काम और विकास होना चाहिए।
‘सबका साथ, सबका विकास’ पर जोर
विजय सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने बेरोजगारी कम करने, युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने, गरीबों के कल्याण और किसानों की स्थिति बेहतर करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई।
सामाजिक समरसता को लेकर भी बयान
मंत्री ने सनातन संस्कृति को लेकर दिए जाने वाले विवादित बयानों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर समाज में तनाव पैदा करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि सामाजिक ताने-बाने को मजबूत बनाए रखने के लिए आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना जरूरी है।
‘विभाजन की राजनीति’ को लेकर जनता से अपील
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि समाज को ऐसी राजनीति से आगे बढ़ना चाहिए, जो लोगों को जाति या अन्य पहचान के आधार पर अलग-अलग खेमों में बांटे। उन्होंने राष्ट्रहित, विकास और सामाजिक एकता को प्राथमिकता देने की बात कही।
मंत्री के इस बयान के बाद बिहार की जातीय राजनीति और सामाजिक समीकरणों को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने के आसार हैं।
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