Last updated: September 1st, 2026 at 09:54 am

Bihar Politics: बिहार में आरक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक बहस अब और तेज हो गई है। जीतन राम मांझी और संतोष सुमन की ओर से आरक्षण में आरक्षण की मांग के बीच इमामगंज की विधायक दीपा मांझी ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने राजद नेता रोहिणी आचार्य के आरक्षण की समीक्षा संबंधी बयान पर सोशल मीडिया के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी।
‘ज्ञान नहीं, गरीबों को अधिकार चाहिए’
दीपा मांझी ने अपने पोस्ट में कहा कि गरीब और वंचित वर्गों के मुद्दों पर केवल उपदेश देने के बजाय यह जवाब मिलना चाहिए कि उन्हें उनका अधिकार और प्रतिनिधित्व कब मिलेगा। उन्होंने सामाजिक-आर्थिक असमानता का हवाला देते हुए कहा कि आज भी कई परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षण किसी की कृपा नहीं, बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के लिए संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आरक्षण का लाभ समाज के सबसे पिछड़े वर्गों तक किस हद तक पहुंचा है।
‘अपने कोटे में कोटा’ की मांग पर जोर
दीपा मांझी ने कहा कि उनकी मांग किसी का अधिकार छीनने की नहीं है। उनका तर्क है कि जो समुदाय आरक्षण का लाभ मिलने के बावजूद सबसे पीछे रह गए हैं, उन्हें भी शिक्षा, नौकरी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उचित अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने ‘जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ की बात दोहराते हुए अपने कोटे में कोटा यानी आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग को सही ठहराया।
रोहिणी आचार्य के बयान पर पलटवार
दरअसल, रोहिणी आचार्य ने कहा था कि जब तक समाज में सामाजिक और आर्थिक गैर-बराबरी मौजूद है, तब तक आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा उचित नहीं होगी। इसी बयान के जवाब में दीपा मांझी ने उन पर निशाना साधा और कहा कि आरक्षण तथा सामाजिक न्याय पर बहस केवल बयानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आंकड़ों और वास्तविक सामाजिक स्थिति के आधार पर होनी चाहिए।
बिहार में आरक्षण पर बढ़ रही राजनीतिक बहस
आरक्षण में आरक्षण के मुद्दे को लेकर बिहार में अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। एक तरफ मांझी परिवार पिछड़े और अति-वंचित वर्गों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इस व्यवस्था की समीक्षा को लेकर विपक्षी नेताओं की अलग राय सामने आ रही है।
दीपा मांझी ने अपने बयान के जरिए साफ संकेत दिया है कि आरक्षण के भीतर हिस्सेदारी का मुद्दा आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और जोर पकड़ सकता है।
![]()
Comments are off for this post.