Last updated: September 1st, 2026 at 10:31 am

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के हालिया बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा था कि आगामी चुनाव में बीजेपी की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी किसे मिलेगी। अब मौर्य ने अपने बयान पर सफाई देते हुए पार्टी की प्रक्रिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपने रिश्ते को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने की इच्छा होना अलग बात है, लेकिन इस पद का फैसला उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव के बाद पार्टी नेतृत्व, केंद्रीय पर्यवेक्षकों और नवनिर्वाचित विधायकों की राय के आधार पर मुख्यमंत्री का चयन किया जाएगा।
मौर्य ने कहा कि उन्होंने केवल इतना कहा था कि उनके मन में भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा हो सकती है। लेकिन इसका अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। उनके मुताबिक, 2027 के चुनाव के बाद चुने गए विधायकों की राय और पार्टी की प्रक्रिया के आधार पर इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
योगी के साथ रिश्तों पर भी दिया जवाब
केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ किसी तरह के मतभेद की अटकलों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता वर्ष 2017 से मिलकर सरकार चला रहे हैं और जनता की सेवा कर रहे हैं।
डिप्टी सीएम ने कहा कि उनके और योगी आदित्यनाथ के बीच मतभेद की तस्वीर पेश करने की कोशिश की जाती है, लेकिन ऐसा कोई विवाद नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर दोनों के बीच दीवार होती तो वह मुख्यमंत्री योगी की सरकार में उपमुख्यमंत्री नहीं होते।
मौर्य के पुराने बयान से शुरू हुई थी चर्चा
दरअसल, एक इंटरव्यू के दौरान केशव प्रसाद मौर्य से पूछा गया था कि क्या वह उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। इस पर उन्होंने कहा था कि वह भी मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं, लेकिन यह फैसला उनके चाहने से नहीं होगा।
इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इसे बीजेपी के अंदरूनी मतभेद से जोड़ते हुए सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधा था।
हालांकि, अब मौर्य ने अपने ताजा बयान के जरिए साफ करने की कोशिश की है कि मुख्यमंत्री पद का फैसला व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि बीजेपी के संगठनात्मक निर्णय और चुनाव के बाद की प्रक्रिया से होगा। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी बीजेपी में नेतृत्व को लेकर होने वाली आगे की गतिविधियों पर नजर बनी रहेगी।
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