Last updated: September 2nd, 2026 at 02:58 pm

बिहार में लगातार सामने आ रही प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने की घटनाओं के बीच राज्य सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया है। सरकार ने बिहार परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का गठन किया है और पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे जस्टिस हरीश कुमार को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति का उद्देश्य राज्य में होने वाली विभिन्न सरकारी और भर्ती परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर उसमें जरूरी सुधारों की सिफारिश करना है।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार समिति राज्य सरकार के बोर्डों और विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाओं की प्रक्रिया का अध्ययन करेगी। इसमें परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान और परीक्षा केंद्रों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया जा सकता है। समिति का काम केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं होगा, बल्कि राज्य की व्यापक परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देना होगा।
बिहार में पिछले कुछ समय में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से लगातार सवाल उठाए गए हैं। पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के मामलों ने बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को प्रभावित किया है। इन घटनाओं के कारण परीक्षा देने वाले युवाओं को दोबारा तैयारी करनी पड़ती है और कई बार परीक्षा की नई तारीख का इंतजार भी करना पड़ता है। सरकार ने इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला किया है।
इस बीच बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC से संबंधित परीक्षाओं को लेकर भी राज्य सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव की बात कही है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि आगामी BPSC परीक्षाओं को एकीकृत यानी सिंगल-टेस्ट प्रारूप तैयार करने के उद्देश्य से फिलहाल आगे बढ़ाने में समय लिया जा रहा है। उनका कहना है कि उम्मीदवारों की संख्या काफी अधिक है और आयोग को नई व्यवस्था के लिए पर्याप्त तैयारी की जरूरत है।
परीक्षा सुधार समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी व्यवस्था तैयार करना होगी जिसमें प्रश्नपत्र की गोपनीयता और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों पर निगरानी, डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं तथा परिणामों की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि समिति की अंतिम सिफारिशों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार किन बदलावों को लागू करती है।
बिहार में सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए परीक्षा प्रणाली में सुधार बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में एक छोटी सी गड़बड़ी भी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के वर्षों के प्रयास को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की सुरक्षा से लेकर परिणाम जारी होने तक पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना सरकार के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें आने के बाद राज्य सरकार के सामने उन्हें लागू करने की चुनौती भी होगी। केवल नियम बनाने के बजाय परीक्षा केंद्रों पर उनका प्रभावी पालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा। साथ ही किसी भी अनियमितता की शिकायत मिलने पर तेजी से जांच और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था भी परीक्षा प्रणाली में उम्मीदवारों का भरोसा बढ़ा सकती है।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार ने प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति अब परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद कमियों का अध्ययन कर सुधारों की सिफारिश करेगी। आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट बिहार की भर्ती और प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का आधार बन सकती है।
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