Last updated: September 2nd, 2026 at 03:09 pm

बिहार के बांका जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई में फुल्लीदुमर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) अमित प्रताप सिंह को कथित तौर पर ₹75 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई बिहार के निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (VIB) की टीम ने की। मामले में BDO के मामा बच्चन प्रसाद सिंह को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, निगरानी विभाग को BDO के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत मिली थी। शिकायत के बाद अधिकारियों ने मामले की प्रारंभिक जांच की और आरोपों की पुष्टि के लिए जाल बिछाया। इसके बाद निगरानी टीम ने तय योजना के अनुसार कार्रवाई की। आरोप है कि BDO ने सरकारी काम से संबंधित अनुमति या प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बदले ₹75 हजार की रकम मांगी थी।
निगरानी टीम की कार्रवाई के दौरान अमित प्रताप सिंह को कथित रूप से रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए पकड़ लिया गया। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी बांका शहर स्थित नेहरू कॉलोनी में BDO के निजी आवास पर की गई। कार्रवाई के बाद टीम ने आरोपी अधिकारी को अपने कब्जे में ले लिया और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
मामले में BDO के मामा बच्चन प्रसाद सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक रिश्वत की रकम कथित तौर पर उन्हें सौंपे जाने की बात सामने आई है, जिसके बाद निगरानी टीम ने उन्हें भी हिरासत में लिया। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि रिश्वत की रकम के लेन-देन में उनकी वास्तविक भूमिका क्या थी।
यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार में सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। रिश्वत की शिकायत मिलने के बाद ट्रैप ऑपरेशन के जरिए सरकारी अधिकारियों को पकड़ना VIB की प्रमुख कार्रवाई में शामिल है। इस तरह की गिरफ्तारियों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं के बदले अवैध रकम मांगने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करना और आम लोगों की शिकायतों पर त्वरित कदम उठाना है।
BDO जैसे अधिकारी प्रखंड स्तर पर विकास योजनाओं और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी करते हैं। इसलिए किसी BDO पर रिश्वत लेने का आरोप लगना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, गिरफ्तारी और आरोप लगाए जाने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही यह तय होगा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप कितने सही हैं।
निगरानी विभाग अब यह भी जांच सकता है कि कथित रिश्वत की मांग किस काम के लिए की गई थी और क्या इसमें किसी अन्य सरकारी कर्मचारी या व्यक्ति की भूमिका थी। ट्रैप कार्रवाई के दौरान बरामद रकम, शिकायतकर्ता के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी BDO को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत के सामने पेश किया जाएगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे की हिरासत, जमानत या अन्य कानूनी प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी। निगरानी विभाग की जांच पूरी होने के बाद मामले में विस्तृत जानकारी सामने आने की संभावना है।
इस घटना से एक दिन पहले भी बांका में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में कार्रवाई की खबर सामने आई थी। इसके कारण जिले में सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की गतिविधियां चर्चा में हैं। हालांकि दोनों मामलों की अपनी अलग जांच और कानूनी प्रक्रिया है।
बांका के फुल्लीदुमर BDO अमित प्रताप सिंह की ₹75 हजार की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तारी बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की एक अहम कार्रवाई है। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि रिश्वत किस काम के लिए मांगी गई थी, BDO के साथ हिरासत में लिए गए व्यक्ति की क्या भूमिका थी और मामले में आगे किन लोगों के नाम सामने आते हैं।
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