Last updated: September 2nd, 2026 at 03:14 pm

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी मिलने के बाद राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में चिंता बढ़ गई है। चिराग पासवान को मंगलवार को डाक के माध्यम से एक गुमनाम धमकी भरा पत्र मिला, जिसमें उन्हें जल्द ही कथित तौर पर ‘कट्टर आतंकवादियों’ द्वारा मार दिए जाने की बात लिखी गई थी। मामले की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को दी गई है।
धमकी मिलने के बाद चिराग पासवान की पार्टी ने मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। पार्टी नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से यह पता लगाने का आग्रह किया है कि धमकी भरा पत्र किसने भेजा और उसमें दिए गए मोबाइल नंबरों का संबंध किन लोगों से है। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पत्र में दो मोबाइल नंबर भी लिखे हुए थे, जिन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखा गया है।
LJP (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने इस घटना को गंभीर बताते हुए चिराग पासवान की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि चिराग को इससे पहले भी धमकी मिल चुकी है और ऐसी स्थिति में सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। पार्टी चाहती है कि सुरक्षा एजेंसियां धमकी की वास्तविकता और उसके पीछे मौजूद लोगों का जल्द पता लगाएं।
चिराग पासवान को पहले से ही उच्च स्तर की सुरक्षा प्राप्त है। ताजा धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह पता लगाने की है कि पत्र केवल डराने की कोशिश था या इसके पीछे कोई वास्तविक आपराधिक साजिश है। जांच एजेंसियां पत्र की सामग्री, उसमें लिखे मोबाइल नंबरों और उसे भेजने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान के लिए उपलब्ध तकनीकी और अन्य सुरागों की जांच कर सकती हैं।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब बिहार की राजनीति में आरक्षण को लेकर नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी चल रही है। चिराग पासवान हाल के दिनों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में उप-वर्गीकरण समेत कई मुद्दों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। पार्टी ने हालांकि यह दावा नहीं किया है कि ताजा धमकी किसी विशेष राजनीतिक विवाद से जुड़ी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही इसके पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
पार्टी नेताओं ने यह भी याद दिलाया कि चिराग पासवान को जुलाई 2025 में सोशल मीडिया के माध्यम से भी धमकी मिलने की घटना सामने आई थी। उस मामले में पटना साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की गई थी और इसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी। ताजा घटना के बाद पार्टी ने दोबारा सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग की है।
धमकी मिलने की सूचना सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्राथमिकता पत्र की विश्वसनीयता और स्रोत का पता लगाना है। किसी भी धमकी को वास्तविक खतरा मानकर शुरुआती स्तर पर जांच करना सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा होता है। साथ ही जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि पत्र भेजने वाले व्यक्ति ने जिन नंबरों का इस्तेमाल किया या जिन नंबरों का उल्लेख किया, वे किससे जुड़े हैं।
राजनीतिक नेताओं को मिलने वाली धमकियों के मामलों में अक्सर सोशल मीडिया, फोन और डाक के माध्यम से संदेश भेजे जाते हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ पत्र की उत्पत्ति, डाक मार्ग और संभावित संदिग्धों की गतिविधियों की भी जांच करती हैं। इस मामले में भी आगे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि धमकी के पीछे कोई संगठित नेटवर्क था या यह किसी व्यक्ति की आपराधिक हरकत थी।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को मिले गुमनाम धमकी पत्र ने उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पार्टी ने गृह मंत्रालय से विस्तृत जांच और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। अब जांच एजेंसियों की प्राथमिकता धमकी के स्रोत, पत्र में दिए गए मोबाइल नंबरों और इसके पीछे की वास्तविक मंशा का पता लगाना होगी।
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