Last updated: September 4th, 2026 at 03:46 pm

सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने इस बार पहले से ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण और नियमों के पालन की निगरानी के लिए 334 टीमें तैनात की जाएंगी, जो अलग-अलग इलाकों में चौबीसों घंटे निरीक्षण करेंगी। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह जानकारी दी। सरकार ने खास तौर पर शहर के 48 चिन्हित प्रदूषण हॉटस्पॉट पर निगरानी और कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है।
प्रदूषण के खिलाफ यह अभियान सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक चलाया जाएगा। दिल्ली सरकार का कहना है कि इस बार रणनीति केवल सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई करने की नहीं होगी, बल्कि प्रदूषण के संभावित स्रोतों की पहले से पहचान कर उन पर लगातार नजर रखी जाएगी। इसके लिए दिल्ली के अलग-अलग सब-डिवीजन और वार्ड स्तर पर टीमें सक्रिय रहेंगी।
सरकार की योजना के मुताबिक दिल्ली की 39 सब-डिवीजनों में दो-दो टीमें तैनात की जाएंगी। इन टीमों का नेतृत्व दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति यानी DPCC के सहायक अभियंता या कनिष्ठ अभियंता स्तर के अधिकारी करेंगे। टीमों को दिन के साथ-साथ रात में भी निरीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य ऐसे प्रदूषण स्रोतों पर कार्रवाई करना है जो सामान्य निरीक्षण के दौरान आसानी से पकड़ में नहीं आते।
इन टीमों की निगरानी में कई प्रमुख प्रदूषण स्रोत होंगे। इनमें बायोमास जलाना, निर्माण और तोड़फोड़ से पैदा होने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, प्रतिबंधित या अनधिकृत ईंधन का इस्तेमाल और खुले में कचरा फेंकना शामिल हैं। अधिकारियों को उल्लंघन मिलने पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण और डिमोलिशन गतिविधियों को Dust Portal के दायरे में लाने तथा प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों के पालन की भी निगरानी की जाएगी।
डीजल जनरेटर सेट भी अभियान के महत्वपूर्ण केंद्र में रहेंगे। टीमों को Commission for Air Quality Management (CAQM) के दिशा-निर्देशों के अनुपालन की जांच करने के लिए कहा गया है। राजधानी में बिजली की जरूरत, निर्माण गतिविधियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कारण जनरेटर के इस्तेमाल पर भी नजर रखी जाएगी। सरकार का लक्ष्य नियमों के उल्लंघन को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ना है ताकि प्रदूषण बढ़ने के बाद बड़े पैमाने पर आपात कार्रवाई की स्थिति न बने।
यह अभियान केवल दिल्ली सरकार की एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यावरण विभाग, DPCC, जिला प्रशासन, नगर निकायों और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है। केंद्रीय स्तर पर भी दिल्ली-NCR के प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बैठक हो चुकी है, जिसमें दिल्ली के अलावा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों एवं पर्यावरण विभाग से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। NCR की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए प्रदूषण के कई स्रोत दिल्ली की सीमाओं के बाहर भी होते हैं, इसलिए अंतरराज्यीय समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण होते हैं। वाहन उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा या जैविक सामग्री जलाना और आसपास के राज्यों में पराली जलाने जैसी गतिविधियां लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। ऐसे में दिल्ली सरकार की नई व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ निगरानी रखना है, ताकि किसी एक कारण पर निर्भर रहने के बजाय प्रदूषण नियंत्रण के लिए बहुस्तरीय कार्रवाई की जा सके।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि इस साल की रणनीति जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी और तत्काल कार्रवाई पर आधारित होगी। अधिकारियों को प्रदूषण के स्रोतों की जल्द पहचान करने और नियमों के उल्लंघन पर तेजी से कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार सर्दियों के प्रदूषण सीजन से पहले ही प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय करना चाहती है।
दिल्ली में 334 टीमों की तैनाती और 48 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी राजधानी में सर्दियों के प्रदूषण से निपटने की बड़ी तैयारी है। यदि टीमें नियमित रूप से निरीक्षण करती हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर समय रहते कार्रवाई होती है, तो प्रदूषण के प्रमुख स्थानीय स्रोतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि दिल्ली की हवा को लंबे समय तक बेहतर रखने के लिए NCR के अन्य राज्यों के साथ लगातार समन्वय और प्रदूषण के सभी स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई जरूरी होगी।
![]()
Comments are off for this post.