Last updated: September 8th, 2026 at 03:17 pm

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में फिल्म निर्माण की संभावनाओं को लेकर अभिनेता पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु ने उत्साह जताया है। श्रीनगर में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (IFFJK) के दूसरे दिन दोनों कलाकारों ने कहा कि कश्मीर सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, स्थानीय लोगों और जमीन से जुड़ी कहानियों के लिए भी सिनेमा के लिहाज से बेहद खास है।
स्थानीय संस्कृति में छिपी हैं कई कहानियां
श्रीनगर के SKICC में मीडिया से बातचीत के दौरान पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु ने कश्मीर में अपने अनुभव साझा किए। दोनों ने स्थानीय खान-पान, लोगों के व्यवहार और यहां मिले अपनापन की तारीफ की।
कलाकारों ने कहा कि कश्मीर में फिल्म निर्माण को सिर्फ खूबसूरत लोकेशन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। यहां की रोजमर्रा की जिंदगी, संस्कृति, खान-पान और लोगों की कहानियां भी फिल्मकारों को नए विषय दे सकती हैं।
थिएटर और OTT के लिए भी संभावनाएं
पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सिनेमा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की काफी गुंजाइश है। थिएटर, OTT और दूसरे माध्यमों के जरिए स्थानीय कहानियों को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाया जा सकता है।
दोनों अभिनेताओं ने कश्मीर में आगे भी फिल्मों की शूटिंग करने की इच्छा जताई। उनका कहना है कि अगर फिल्म निर्माण से जुड़ा बुनियादी ढांचा और मजबूत होता है तो यह क्षेत्र देशभर के फिल्म निर्माताओं के लिए और आकर्षक बन सकता है।
युवा प्रतिभाओं को मिलेगा फायदा
IFFJK में छात्रों और फिल्म निर्माण में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं की भागीदारी पर भी दोनों कलाकारों ने बात की। उन्होंने कहा कि ऐसे फिल्म फेस्टिवल और मास्टरक्लास युवा प्रतिभाओं को अनुभवी कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों से सीखने का अवसर देते हैं।
उनके मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में विकसित होता फिल्म इकोसिस्टम स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और रचनात्मक अवसरों के नए रास्ते खोल सकता है।
कश्मीर का सिनेमा से पुराना रिश्ता
अभिनेताओं ने कश्मीर और हिंदी फिल्म उद्योग के पुराने संबंध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से फिल्म निर्माता और कलाकार कश्मीर की वादियों में गानों और फिल्मों की शूटिंग के लिए आते रहे हैं।
हालांकि, अब कश्मीर को केवल शूटिंग लोकेशन के तौर पर देखने के बजाय यहां के लोगों और सांस्कृतिक जीवन को भी फिल्मों की कहानियों का हिस्सा बनाया जा सकता है। दोनों कलाकारों ने कहा कि कश्मीर की असली विविधता उसकी वादियों के साथ-साथ यहां के समाज और जीवन में भी दिखाई देती है।
IFFJK में देश-विदेश से फिल्म निर्माता, कलाकार, तकनीकी विशेषज्ञ, छात्र और सिनेमा प्रेमी हिस्सा ले रहे हैं।
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