Last updated: September 8th, 2026 at 03:23 pm

उत्तर प्रदेश में मानव-तेंदुआ संघर्ष को कम करने और बचाए गए तेंदुओं के पुनर्वास के लिए राज्य की पहली लेपर्ड सफारी विकसित करने की योजना तैयार की गई है। प्रस्तावित सफारी पीलीभीत और शाहजहांपुर जिलों में फैले गोपालपुर वन क्षेत्र में बनाई जाएगी। परियोजना का कुल क्षेत्रफल करीब 1,974 हेक्टेयर होगा।
वन विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, इस क्षेत्र में 944.6 हेक्टेयर हिस्सा पीलीभीत और 1,030.1 हेक्टेयर शाहजहांपुर में होगा। परियोजना को राज्य सरकार से मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के पास भेजा गया है। सफारी शुरू करने के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की मंजूरी जरूरी है।
प्रस्तावित सफारी का मुख्य उद्देश्य ऐसे तेंदुओं को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना है जिन्हें मानव आबादी के नजदीक से बचाया जाता है। वन विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ समय से इंसान और तेंदुए के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में सुरक्षित और नियंत्रित वन क्षेत्र तैयार करने से rescued तेंदुओं के प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
सफारी में पर्यटकों के लिए निर्धारित मार्ग बनाया जाएगा। इसके अलावा प्रवेश द्वार, थिएटर और तेंदुओं को सुरक्षित रखने के लिए विशेष फेंसिंग की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में तेंदुओं को देख सकें, जबकि जानवरों और लोगों के बीच सुरक्षित दूरी बनी रहे। परियोजना के लिए करीब 49.45 करोड़ रुपये के अनुदान की जरूरत बताई गई है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में तेंदुओं की संख्या बढ़ने के साथ मानव-तेंदुआ संघर्ष भी चिंता का विषय बना हुआ है। जनवरी 2026 से अब तक उत्तर प्रदेश में करीब 200 तेंदुओं को रेस्क्यू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें से कई तेंदुओं को बाद में जंगलों में छोड़ा गया, जबकि लगातार बढ़ते संघर्ष के कारण स्थायी प्रबंधन व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
लखीमपुर खीरी, बहराइच, बिजनौर और मुरादाबाद समेत कई जिलों में तेंदुओं के हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। लखीमपुर खीरी में इस साल मानव-तेंदुआ संघर्ष से आठ लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। बहराइच में भी कई तेंदुओं को रेस्क्यू किया गया है। बिजनौर लंबे समय से मानव-तेंदुआ संघर्ष वाले प्रमुख इलाकों में शामिल रहा है। इन घटनाओं ने सुरक्षित पुनर्वास और संघर्ष प्रबंधन की जरूरत को और बढ़ाया है।
प्रस्तावित परियोजना में वन क्षेत्र को बड़े पैमाने पर संरक्षित रखने की योजना है। तेंदुओं को फेंसिंग पार करने से रोकने के लिए पेड़ों और वनस्पति की ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे उनकी आवाजाही नियंत्रित क्षेत्र के भीतर रहे। विभाग ने परियोजना क्षेत्र का सर्वे भी कराया है, जिसमें वन्यजीवों की मौजूदगी, उनके पदचिह्न, आवास और क्षेत्र की वनस्पति से जुड़ी जानकारी जुटाई गई है।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 की तेंदुआ गणना के दौरान 371 तेंदुए दर्ज किए गए थे। इनमें पीलीभीत में 29 और दुधवा नेशनल पार्क क्षेत्र में 125 तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई थी। हालांकि पूरे राज्य में तेंदुओं की वास्तविक संख्या इससे काफी अधिक होने का अनुमान वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने व्यक्त किया है।
सफारी बनने से वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में तेंदुओं को देख सकेंगे और क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। हालांकि परियोजना की प्राथमिकता पर्यटन से अधिक वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-तेंदुआ संघर्ष को नियंत्रित करना होगी।
उत्तर प्रदेश के वन विभाग के सामने अब केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की मंजूरी हासिल करने और परियोजना को निर्धारित वन्यजीव संरक्षण मानकों के अनुरूप विकसित करने की चुनौती है। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण और प्रबंधन की अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी। परियोजना पूरी होने पर यह राज्य में तेंदुओं के संरक्षण, पुनर्वास और नियंत्रित वन्यजीव पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकती है।
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