Last updated: September 9th, 2026 at 10:21 am

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और राज्य क्रिकेट संघों के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम सवाल उठाया है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों से पूछा कि उन्हें ‘नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025’ के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने क्रिकेट संस्थाओं की ओर से पेश वकीलों से इस मुद्दे पर निर्देश लेकर जवाब देने को कहा।
पदाधिकारियों की सेवा शर्तों पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि BCCI और राज्य क्रिकेट संघों के पदाधिकारियों की सेवा शर्तें लागू हो चुके 2025 के कानून के प्रावधानों के अंतर्गत क्यों नहीं आनी चाहिए। अदालत के इस सवाल के बाद BCCI के प्रशासनिक ढांचे और उसके पदाधिकारियों के कार्यकाल से जुड़े नियमों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
2014 से चल रहा है BCCI से जुड़ा मामला
BCCI से संबंधित यह मामला सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2014 से लंबित है। इस दौरान क्रिकेट प्रशासन में सुधार को लेकर कई अर्जियां दाखिल की गईं। शीर्ष अदालत ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की थी, जिसने क्रिकेट प्रशासन में सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे।
इन सिफारिशों में BCCI के लिए नए संविधान और संस्था के कामकाज में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट प्रशासन में सुधार से संबंधित कई सिफारिशों को स्वीकार किया था।
पदाधिकारियों के कार्यकाल पर भी हुआ था बदलाव
BCCI के पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर सितंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने BCCI के संविधान में किए गए संशोधनों को मंजूरी दी थी। इसके तहत कोई पदाधिकारी लगातार अधिकतम 12 साल तक पद पर रह सकता था। इसमें छह साल राज्य क्रिकेट संघ और छह साल BCCI में रहने का प्रावधान शामिल था।
इसके बाद तीन साल का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ रखा गया था। अदालत ने राज्य संघ और BCCI दोनों स्तरों पर लगातार दो कार्यकाल तक एक ही पद पर बने रहने की भी अनुमति दी थी।
अब नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 के तहत BCCI और राज्य क्रिकेट संघों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सवाल से मामले में एक नया कानूनी पहलू जुड़ गया है।
![]()
Comments are off for this post.