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दिल्ली में जर्जर PG पर बड़ी कार्रवाई, सर्वे में 52 खतरनाक इमारतें चिन्हित

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत गिरने के बाद राजधानी में जर्जर और असुरक्षित छात्र आवासों के
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दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत गिरने के बाद राजधानी में जर्जर और असुरक्षित छात्र आवासों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। हादसे में सात लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने अलग-अलग इलाकों में PG और निजी हॉस्टल की सुरक्षा जांच शुरू की है। शुरुआती सर्वे में कई ऐसी इमारतें सामने आई हैं, जिनकी संरचनात्मक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 52 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में चिन्हित किया गया है।

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    सत्य निकेतन में हुए हादसे ने दिल्ली में छात्रों के लिए संचालित PG व्यवस्था की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस इमारत में हादसा हुआ, वह छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे के बाद आसपास की इमारतों की भी जांच की गई और कुछ संरचनाओं को असुरक्षित पाए जाने पर खाली कराने तथा ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई है। दुर्घटनाग्रस्त इमारत से सटी एक अन्य असुरक्षित इमारत को भी गिराने का काम शुरू कर दिया गया है।

     

    प्रशासन की कार्रवाई केवल सत्य निकेतन तक सीमित नहीं रखी जा रही है। दिल्ली के उन इलाकों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहां बड़ी संख्या में छात्र PG और निजी हॉस्टल में रहते हैं। मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर, सत्य निकेतन और साकेत जैसे छात्र इलाकों में भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा, निर्माण की अनुमति और अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों की जांच की जा रही है।

     

    जांच के दौरान अवैध निर्माण भी एक बड़ी चिंता के रूप में सामने आया है। सत्य निकेतन इलाके में कई इमारतों में निर्धारित अनुमति से अधिक मंजिलें बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ भवनों के निचले हिस्सों में दुकानें और ऊपरी मंजिलों में PG संचालित होने की बात भी सामने आई है। ऐसे निर्माणों की वैधता और संरचनात्मक क्षमता की जांच अब प्रशासनिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।

     

    दिल्ली सरकार ने PG और निजी हॉस्टल को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित करने के लिए नए नियम लाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। प्रस्तावित कानून के तहत PG संचालकों के लिए लाइसेंस लेना जरूरी किया जा सकता है। इसके अलावा पुलिस क्लीयरेंस और संरचनात्मक तथा अग्नि सुरक्षा से जुड़े अनापत्ति प्रमाणपत्र भी आवश्यक किए जाने का प्रस्ताव है। प्रत्येक PG को एक विशिष्ट पंजीकरण संख्या देने और उसकी जानकारी एक सार्वजनिक ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराने की योजना है।

     

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वाले PG संचालकों पर कार्रवाई की जा सकेगी। बड़े आवासीय परिसरों में CCTV कैमरे, सुरक्षा कर्मचारियों और जिम्मेदार वार्डन जैसी व्यवस्थाओं को भी अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इससे छात्रों और उनके परिवारों को PG चुनने से पहले उसकी वैधता और सुरक्षा संबंधी जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है।

     

    सत्य निकेतन हादसे के बाद कई छात्र अब असुरक्षित माने जा रहे PG खाली कर रहे हैं। कुछ इलाकों में छात्रों ने अपनी जरूरी चीजें लेकर दूसरी जगहों पर जाने का फैसला किया है। छात्रों का कहना है कि वे ऐसी इमारतों में रहने को लेकर चिंतित हैं जिनकी संरचनात्मक सुरक्षा की नियमित जांच नहीं होती। इस वजह से प्रशासन पर जल्द और व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने का दबाव बढ़ गया है।

     

    मामला अब न्यायिक स्तर पर भी पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के PG, निजी हॉस्टल और छात्र आवासों की सुरक्षा जांच से जुड़ी याचिका पर विचार करने की सहमति दी है। अदालत के सामने भवन सुरक्षा और निर्माण नियमों के उल्लंघन से जुड़े व्यापक मुद्दे भी उठाए गए हैं।

     

    सत्य निकेतन हादसे के बाद शुरू हुई कार्रवाई का उद्देश्य केवल तत्काल खतरे वाली इमारतों को हटाना नहीं है, बल्कि दिल्ली में छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करना भी है। आने वाले दिनों में सर्वे और जांच के आधार पर और इमारतों पर कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि PG और हॉस्टल में रहने वाले हजारों छात्रों को सुरक्षित, नियमों के अनुरूप और संरचनात्मक रूप से भरोसेमंद आवास उपलब्ध हो।

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