Last updated: September 15th, 2026 at 11:44 am

UPI पेमेंट को लेकर इन दिनों एक बड़ा दावा चर्चा में है कि ₹2,000 से ज्यादा के डिजिटल भुगतान पर सरकार 0.5 फीसदी टैक्स या शुल्क वसूलने जा रही है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि फिलहाल ₹2,000 से अधिक के किसी भी UPI भुगतान पर 0.5 फीसदी सरकारी टैक्स तय नहीं किया गया है।
उनके मुताबिक ₹5,000 के भुगतान पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 शुल्क लगने की जो गणना सामने आ रही है, वह केवल 0.5 फीसदी की काल्पनिक दर के आधार पर है। इसे मौजूदा सरकारी शुल्क नहीं माना जा सकता।
14 सितंबर की अधिसूचना में क्या कहा गया?
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 14 सितंबर 2026 को एक गजट अधिसूचना जारी की। इसमें RuPay डेबिट कार्ड और ₹2,000 तक के UPI लेनदेन को ऐसी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान व्यवस्था के रूप में निर्धारित किया गया है, जिस पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क नहीं लगा सकते।
हालांकि, इस अधिसूचना का अर्थ यह नहीं है कि ₹2,000 से ऊपर के हर UPI ट्रांजेक्शन पर 0.5 फीसदी शुल्क लागू हो गया है। अधिसूचना में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान के लिए 0.5 फीसदी की कोई अंतिम दर निर्धारित नहीं की गई है।
₹5,000 और ₹10,000 के UPI पेमेंट पर कितना चार्ज?
अगर सिर्फ 0.5 फीसदी की दर से गणना की जाए तो ₹5,000 पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 बनते हैं। लेकिन फिलहाल यह किसी सरकारी शुल्क सूची का हिस्सा नहीं है।
हालांकि, बड़े मर्चेंट पेमेंट को लेकर भविष्य में MDR यानी Merchant Discount Rate की व्यवस्था पर चर्चा जरूर हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर संभावित शुल्क को लेकर बैंकों और पेमेंट सेक्टर की कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। करीब 0.4 फीसदी की संभावित दर की चर्चा सामने आई है, लेकिन इसे अभी अंतिम सरकारी दर नहीं माना जा सकता।
आम UPI यूजर को देना होगा टैक्स?
फिलहाल उपलब्ध सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांसफर पर कोई नया टैक्स लागू नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि दोस्त या परिवार के किसी सदस्य को ₹5,000 या ₹10,000 UPI से भेजने पर 0.5 फीसदी सरकारी टैक्स कटने की बात सही नहीं है।
भविष्य में अगर MDR व्यवस्था लागू होती है तो इसका दायरा चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजेक्शन तक सीमित रहने की संभावना है। इसे सीधे आम उपभोक्ता पर टैक्स के तौर पर लगाने की बात फिलहाल सामने नहीं आई है।
UPI को मुफ्त रखने के लिए सरकार देती है इंसेंटिव
UPI और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक समर्थन देने के लिए केंद्र सरकार इंसेंटिव योजना भी चला रही है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार FY2021-22 से FY2024-25 के बीच UPI और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए करीब ₹8,730 करोड़ का इंसेंटिव सपोर्ट दिया गया।
इसलिए फिलहाल UPI पर ₹2,000 की सीमा पार करते ही 0.5 फीसदी सरकारी टैक्स लगने की खबर से घबराने की जरूरत नहीं है। असली चर्चा बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर संभावित MDR को लेकर है, जिसकी अंतिम दर और लागू होने का तरीका अभी तय नहीं हुआ है।
![]()
Comments are off for this post.