Last updated: September 15th, 2026 at 11:54 am

यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर NDA के भीतर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA की सभी 21 राज्य सरकारों में UCC लागू करने के बयान के बाद सहयोगी दलों के रुख सामने आने लगे हैं। जहां कुछ पार्टियों ने इसका खुलकर समर्थन किया है, वहीं कुछ सहयोगियों ने अंतिम निर्णय से पहले प्रस्ताव और उसके प्रावधानों को देखने की बात कही है।
TDP ने किया UCC का समर्थन
आंध्र प्रदेश में सरकार चला रही तेलुगु देशम पार्टी यानी TDP ने UCC के समर्थन का संकेत दिया है। लोकसभा में पार्टी के 16 सांसद हैं और केंद्र की NDA सरकार के लिए उसका समर्थन अहम माना जाता है।
TDP के लोकसभा नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने कहा कि पार्टी UCC का समर्थन करेगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मुद्दे पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं चल रही है और आगे जरूरत के मुताबिक संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी।
TDP का यह रुख इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद NDA में शामिल होने से पहले पार्टी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू UCC के मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय के साथ खड़े होने की बात कह चुके थे।
बिहार में JD(U) का अलग रुख
UCC को लेकर सबसे ज्यादा नजर बिहार की JD(U) पर है। पार्टी नेता श्याम रजक ने कहा है कि JD(U) राष्ट्रीय स्तर पर UCC का समर्थन करती है, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है।
पार्टी का कहना है कि इतने बड़े कानून को लागू करने से पहले देशभर में व्यापक सहमति बननी चाहिए। JD(U) के वरिष्ठ नेता संजय झा ने भी संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत की जाएगी। इससे साफ है कि UCC पर NDA के भीतर सहयोगी दलों की स्थिति पूरी तरह एक जैसी नहीं है।
LJP ने ड्राफ्ट का इंतजार करने के संकेत दिए
बिहार में NDA की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने अभी अपना अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है। पार्टी का कहना है कि UCC का पूरा ड्राफ्ट सामने आने के बाद ही उसके कानूनी प्रावधानों और संभावित प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा।
यानी पार्टी फिलहाल समर्थन या विरोध की अंतिम घोषणा करने के बजाय प्रस्ताव के वास्तविक स्वरूप का इंतजार कर रही है।
बंगाल में भी बढ़ सकती है सियासी गर्मी
पश्चिम बंगाल में भी UCC को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के संकेत हैं। बीजेपी की नई सरकार बनने के बाद पार्टी नेताओं ने इसे अपनी पुरानी प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है।
हालांकि, बीजेपी की सहयोगी Nationalist Citizens Party of India (NCPI) ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है। पार्टी का कहना है कि UCC गंभीर विषय है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत चर्चा जरूरी है।
शिवसेना और HAM(S) समर्थन में
NDA की सहयोगी शिवसेना ने UCC का खुलकर समर्थन किया है। पार्टी ने इसे समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता से जोड़ते हुए सरकार के कदम में सहयोग की बात कही है।
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) यानी HAM(S) ने भी अमित शाह के बयान का स्वागत किया है और UCC के प्रति समर्थन जताया है।
NDA के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सहयोगियों का रुख?
लोकसभा में TDP के 16, शिवसेना के 13, JD(U) के 12, LJP (राम विलास) के 5 और HAM(S) का एक सांसद है। राज्यसभा में भी इन सहयोगी दलों के सदस्य मौजूद हैं।
ऐसे में UCC जैसे राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मुद्दे पर NDA के सहयोगियों की सहमति सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल तस्वीर यह है कि कुछ दल खुलकर समर्थन कर रहे हैं, जबकि JD(U) और LJP जैसे सहयोगी अपने-अपने स्तर पर सावधानी बरत रहे हैं।
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