Last updated: September 15th, 2026 at 11:59 am

इस्लामाबाद: जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान की ओर से बड़ा अपडेट सामने आया है। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, मसूद अजहर का नाम फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) की 2026 की Most Wanted आतंकवादियों की ‘रेड बुक’ में बरकरार है। उसकी गिरफ्तारी या सजा तक पहुंचाने वाली जानकारी देने पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये तक का इनाम भी कायम रखा गया है।
FIA की रेड बुक में 1480 नंबर पर नाम
अधिकारियों के अनुसार मसूद अजहर का नाम FIA की Most Wanted List में 2021 से शामिल है। 2026 की रेड बुक में भी उसे जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख के तौर पर दर्ज किया गया है।
रेड बुक में उसका क्रमांक 1480 बताया गया है, जबकि पूरी सूची में 1,804 Most Wanted आतंकवादियों के नाम शामिल हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, उसका नाम पंजाब के गृह विभाग के अनुरोध पर सूची में शामिल किया गया था।
तीन मामलों में वांछित बताया गया
पाकिस्तानी रिकॉर्ड के अनुसार मसूद अजहर तीन मामलों में वांछित है। ये मामले पाकिस्तान के अलग-अलग Counter Terrorism Department (CTD) थानों में दर्ज किए गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, उसके खिलाफ गुजरांवाला, मुल्तान और लाहौर में आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मामले दर्ज हैं। FIA की एंट्री में गिरफ्तारी या सजा दिलाने में सीधे तौर पर मदद करने वाली सूचना देने वाले व्यक्ति को 70 लाख रुपये तक का इनाम देने की बात कही गई है।
भारत में कई आतंकी मामलों में वांछित
मसूद अजहर भारत में भी लंबे समय से वांछित आतंकवादी है। उसका नाम 2001 के संसद हमले समेत कई आतंकी मामलों से जोड़ा गया है। भारतीय एजेंसियों ने जैश-ए-मोहम्मद को 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा हमले से भी जोड़ा है।
भारत लगातार पाकिस्तान पर मसूद अजहर को संरक्षण देने का आरोप लगाता रहा है। वहीं पाकिस्तान का दावा रहा है कि वह अफगानिस्तान भाग गया था। इस दावे को अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने खारिज किया है।
FATF बैठक से पहले सामने आया अपडेट
मसूद अजहर को लेकर यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब Financial Action Task Force (FATF) की अगली पूर्ण बैठक 26 से 30 अक्टूबर के बीच पेरिस में प्रस्तावित है। FATF की बैठकों में देशों की मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग से निपटने की व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाती है।
पाकिस्तान को 2018 में FATF की बढ़ी हुई निगरानी वाली सूची यानी Grey List में रखा गया था। 2022 में निर्धारित Action Plans के तहत किए गए सुधारों के बाद उसे इस सूची से बाहर कर दिया गया था। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े नियमों को मजबूत करना तथा लक्षित वित्तीय प्रतिबंधों को प्रभावी बनाने जैसे कदम शामिल थे।
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