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UCC पर JDU का रुख साफ, पहले ड्राफ्ट देखेगी पार्टी; अमित शाह से बातचीत के बाद होगा अंतिम फैसला

बिहार में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
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बिहार में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के बयान के बाद जनता दल यूनाइटेड ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट किया है। JDU ने कहा है कि वह कानून के प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद ही अंतिम फैसला लेगी। पार्टी ने फिलहाल जल्दबाजी में समर्थन या विरोध करने से दूरी बनाए रखी है।

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    बिहार के उपमुख्यमंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा कि UCC विधेयक के वास्तविक प्रावधान अभी पूरी तरह सामने नहीं आए हैं। ऐसे में पार्टी पहले प्रस्तावित कानून का अध्ययन करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रावधान स्वीकार्य पाए जाते हैं तो पार्टी बिना किसी ठोस कारण के इसका विरोध नहीं करेगी। वहीं, किसी प्रावधान को लेकर आपत्ति या विवाद सामने आने पर केंद्र सरकार के साथ बातचीत की जाएगी।

     

    JDU का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब NDA के भीतर UCC को लेकर अलग-अलग राय दिखाई दे रही है। पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने भी कहा है कि UCC के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की जाएगी। पार्टी का मानना है कि कानून के मसौदे और उसके प्रभाव को समझने के बाद ही अंतिम राजनीतिक निर्णय लिया जाना चाहिए।

     

    इससे पहले JDU के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने बिहार में UCC लागू करने का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी ने संसद में UCC से जुड़े विधेयक पर अपना रुख रखा था, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, अब विजय चौधरी के बयान से पार्टी का तत्काल रुख कुछ अधिक सावधानीपूर्ण नजर आ रहा है। यानी JDU ने अंतिम निर्णय को कानून के वास्तविक प्रावधान सामने आने तक टाल दिया है।

     

    UCC का मुद्दा NDA के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अलग-अलग सहयोगी दलों की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। कुछ सहयोगी दलों ने केंद्र के प्रस्ताव का समर्थन किया है, जबकि JDU समेत कुछ दलों ने व्यापक चर्चा और राज्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखने की जरूरत बताई है। ऐसे में बिहार का रुख राष्ट्रीय स्तर पर NDA के भीतर होने वाली बातचीत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

     

    JDU ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह विपक्षी दलों के दबाव के आधार पर अपना फैसला नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि UCC जैसे संवेदनशील विषय पर निर्णय गठबंधन के भीतर चर्चा और कानून के प्रावधानों के अध्ययन के बाद लिया जाएगा। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी फिलहाल BJP से सीधा टकराव लेने के बजाय बातचीत के जरिए अपनी चिंताओं को रखने की रणनीति अपना रही है।

     

    बिहार की राजनीति में इस मुद्दे का असर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि JDU राज्य में NDA का प्रमुख घटक है। UCC पर पार्टी का अंतिम रुख आने वाले दिनों में BJP और उसके सहयोगियों के बीच राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। 18 सितंबर को होने वाली JDU की महत्वपूर्ण बैठक को भी इसी वजह से अहम माना जा रहा है।

     

    JDU ने न तो UCC को पूरी तरह स्वीकार किया है और न ही इसे सीधे खारिज किया है। पार्टी की मौजूदा स्थिति यही है कि पहले प्रस्तावित कानून के प्रावधानों को देखा जाएगा, उसके बाद पार्टी के भीतर चर्चा होगी और जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार के साथ बातचीत की जाएगी। अब आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि UCC का मसौदा सामने आने के बाद उसमें कौन-कौन से प्रावधान शामिल होते हैं।

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