Last updated: September 16th, 2026 at 11:28 am

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा राजनीतिक विवाद अब विधानसभा की औपचारिक प्रक्रिया तक पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने बागी TMC गुट से जुड़े 10 विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन विधायकों से पार्टी के एक गुट की ओर से दायर अयोग्यता याचिका पर सात दिनों के भीतर अपना जवाब देने को कहा गया है।
इन 10 विधायकों को मिला नोटिस
नोटिस पाने वाले विधायकों में विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी के अलावा अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं।
विधानसभा सूत्रों के मुताबिक, सभी विधायकों से अपना आधिकारिक पक्ष निर्धारित समय के भीतर रखने को कहा गया है। अखरुज्जमान अंसारी ने भी नोटिस मिलने की पुष्टि की है।
विपक्ष के नेता के पद को लेकर पहले से विवाद
TMC के दोनों गुटों के बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। ममता बनर्जी गुट की ओर से वरिष्ठ विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय को इस पद के लिए नामित किया गया था, जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने रिताब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के तौर पर मान्यता दी।
सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। इसके बाद उन्होंने 7 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर 10 विधायकों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की। उनका आरोप था कि इन विधायकों ने पार्टी नेतृत्व और पार्टी हितों के खिलाफ काम किया।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
विधानसभा में कार्रवाई के साथ-साथ यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने सोमवार को शीर्ष अदालत का रुख करते हुए संबंधित विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
दूसरी ओर, रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने TMC के 80 में से 65 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। इस गुट ने अखरुज्जमान अंसारी को मुख्य सचेतक यानी चीफ व्हिप चुने जाने की बात भी सामने आई है।
विवाद का असर संसद तक
TMC के भीतर जारी यह राजनीतिक खींचतान विधानसभा तक सीमित नहीं बताई जा रही है। जून में TMC के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा करने और NDA को समर्थन देने की बात कही थी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष की ओर से इन सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई।
फिलहाल पश्चिम बंगाल विधानसभा की ओर से जारी नोटिस के बाद इन 10 विधायकों के जवाब पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।
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