Last updated: September 18th, 2026 at 02:41 pm

दिल्ली में लगाए गए 500 विशाल राष्ट्रीय ध्वजों को तेज हवा, धूल भरी आंधी और बारिश से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने नया रखरखाव सिस्टम तैयार किया है। इन विशाल तिरंगों के रखरखाव और खराब झंडों को बदलने के लिए करीब 33.47 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नए सिस्टम में अधिक मजबूत और मौसम के अनुकूल कपड़े का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि बार-बार होने वाली क्षति को कम किया जा सके।
दिल्ली में अलग-अलग प्रमुख स्थानों, सड़कों और चौराहों पर लगाए गए इन विशाल तिरंगों में से अधिकांश लगभग 35 मीटर ऊंचे खंभों पर लगे हैं। कुछ स्थानों पर खंभों की ऊंचाई 50 मीटर तक है। तेज हवाओं और धूल भरी आंधियों के दौरान इन झंडों के फटने या क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में सरकार ने इनके लिए अलग तरह की रखरखाव व्यवस्था तैयार करने का फैसला किया है।
नए सिस्टम के तहत तिरंगों के लिए 180 GSM हाइड्रोफोबिक-कोटेड पॉलिएस्टर कपड़े का इस्तेमाल किया जाएगा। इस कपड़े में पानी और दाग को रोकने की क्षमता होगी। इसका उद्देश्य बारिश के दौरान झंडे में पानी कम सोखना है, जिससे झंडे का वजन बढ़ने और कपड़े पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की समस्या को कम किया जा सके। कपड़े की मजबूती बढ़ाने के लिए विशेष सिलाई और अतिरिक्त मजबूती वाली पट्टियों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
नए रखरखाव अनुबंध के तहत कम से कम 10 मोबाइल टीमें तैनात की जाएंगी। प्रत्येक टीम के पास ढकी हुई पिकअप वैन, इलेक्ट्रीशियन, सहायक कर्मचारी और ड्राइवर होंगे। प्रत्येक टीम औसतन 50 तिरंगों की देखभाल करेगी। यदि किसी झंडे या उसके पोल से जुड़ी शिकायत मिलती है, तो टीम को निर्धारित समय के भीतर मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान करना होगा।
शिकायतों पर कार्रवाई में देरी होने पर एजेंसी पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, किसी शिकायत का समय पर समाधान नहीं होने पर संबंधित फ्लैग मास्ट के लिए प्रति घंटे 3,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य रखरखाव एजेंसी को लगातार निगरानी और समय पर मरम्मत के लिए जिम्मेदार बनाना है।
तेज आंधी या बहुत अधिक गति वाली हवाओं की स्थिति में भी नई व्यवस्था के तहत विशेष सावधानी बरती जाएगी। यदि मौसम पूर्वानुमान में 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की तेज हवा की संभावना हो तो झंडों को पहले ही नीचे उतारने की व्यवस्था होगी। मौसम सामान्य होने के बाद निर्धारित समय के भीतर उन्हें दोबारा फहराना होगा। इसमें देरी होने पर भी एजेंसी पर आर्थिक दंड का प्रावधान रखा गया है।
झंडों की सिलाई को भी पहले की तुलना में मजबूत बनाया जाएगा। नए डिजाइन में किनारों पर भारी-भरकम पॉलिएस्टर वेबिंग, मजबूत सिलाई और अतिरिक्त कपड़े की परत का इस्तेमाल किया जाएगा। अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाली जगहों पर भी मजबूती बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इससे तेज हवाओं के दौरान कपड़े के फटने की संभावना कम करने का प्रयास किया जाएगा।
दिल्ली में इन विशाल तिरंगों की स्थापना वर्ष 2022 में शुरू हुई थी। इन्हें शहर के प्रमुख चौराहों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाया गया था। शुरुआती परियोजना में लगभग 500 ऐसे तिरंगों की स्थापना की योजना बनाई गई थी और इसके लिए करीब 104 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया था।
हाल के वर्षों में तेज धूल भरी आंधियों और हवाओं के दौरान कई स्थानों पर तिरंगे क्षतिग्रस्त हुए। सरोजिनी नगर, सीमापुरी, नंद नगरी, निजामुद्दीन, शकरपुर, मदनपुर खादर, अशोक विहार, मालवीय नगर, दिलशाद कॉलोनी, सदर बाजार और धौला कुआं जैसे इलाकों में झंडों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं दर्ज की गई थीं। इन्हीं घटनाओं के बाद अधिक टिकाऊ कपड़े और बेहतर रखरखाव व्यवस्था पर काम किया गया।
नई व्यवस्था में रखरखाव से जुड़ी शिकायतों और कार्रवाई का रिकॉर्ड भी लगातार बनाए रखना होगा। रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखने पर अतिरिक्त जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। इससे सरकार को यह निगरानी करने में मदद मिलेगी कि किस स्थान पर तिरंगे की मरम्मत कब हुई और शिकायत मिलने के बाद कितने समय में कार्रवाई की गई।
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