Last updated: September 20th, 2026 at 01:16 pm

टाटा संस में एन चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए दोबारा चेयरमैन बनाए जाने का मामला अब विवाद में घिर गया है। टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस बोर्ड के फैसले को कानूनी तौर पर अमान्य बताते हुए इसे खारिज कर दिया है। ट्रस्ट्स का कहना है कि कंपनी के नियमों के मुताबिक चेयरमैन की नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की सकारात्मक सहमति जरूरी है, जो इस मामले में पूरी नहीं हुई।
टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त करने के प्रस्ताव को 4:1 के वोट से मंजूरी दी थी। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स ने इस वोटिंग को नियुक्ति को वैध बनाने के लिए पर्याप्त नहीं माना है।
4:1 वोट पर Tata Trusts की आपत्ति
टाटा ट्रस्ट्स की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशक हैं और नियमों के तहत दोनों की सहमति जरूरी है। ट्रस्ट्स के मुताबिक, इन दोनों में से एक निदेशक ने चंद्रशेखरन की नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।
ऐसे में ट्रस्ट्स का तर्क है कि एसोसिएशन के नियमों में निर्धारित सकारात्मक समर्थन की शर्त पूरी नहीं हुई। इसलिए केवल 4:1 के बहुमत के आधार पर प्रस्ताव को वैध नहीं माना जा सकता।
‘कास्टिंग वोट’ के तर्क को भी किया खारिज
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस बोर्ड की ओर से कास्टिंग वोट से जुड़े तर्क पर भी आपत्ति जताई है। ट्रस्ट्स के मुताबिक, चेयरमैन का निर्णायक मत उस स्थिति में इस्तेमाल होता है जब पूरे बोर्ड में वोट बराबर हो जाएं।
ट्रस्ट्स का कहना है कि नामित निदेशकों की सहमति से जुड़ी विशेष शर्त को कास्टिंग वोट के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, मतदान का परिणाम 4:1 हो या कोई दूसरा आंकड़ा, यदि निर्धारित सकारात्मक समर्थन नहीं मिला है तो संबंधित शर्त पूरी नहीं मानी जा सकती।
बोर्ड में ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशक
टाटा ट्रस्ट्स ने अपने बयान में कहा कि टाटा संस के बोर्ड में उसके दो नामित सदस्य हैं। ट्रस्ट्स के मुताबिक, इन दोनों में से एक निदेशक द्वारा प्रस्ताव का विरोध किया जाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि नियमों के तहत दोनों नामित निदेशकों की सहमति जरूरी है।
इसी आधार पर टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से जुड़ा बोर्ड प्रस्ताव निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप मंजूर नहीं हुआ।
साइरस मिस्त्री मामले का दिया हवाला
टाटा ट्रस्ट्स ने अपने दावे के समर्थन में टाटा संस और साइरस मिस्त्री के बीच पुराने विवाद का भी उल्लेख किया है। ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस ने उस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में मौजूद इन विशेष अधिकारों का बचाव किया था।
ट्रस्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने भी उस मामले में टाटा संस की दलीलों को स्वीकार करते हुए संबंधित प्रावधानों को बरकरार रखा था। ऐसे में अब उन्हीं नियमों को अलग तरीके से देखने पर ट्रस्ट्स ने सवाल उठाया है।
फिलहाल टाटा संस बोर्ड के फैसले और टाटा ट्रस्ट्स की आपत्ति के बाद चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर कानूनी और कॉरपोरेट स्तर पर विवाद बढ़ गया है। आगे इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।
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