Last updated: September 23rd, 2026 at 02:06 pm

बिहार के जमुई जिले में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी नंदन यादव को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ में नंदन के पैर में गोली लगी। उसके साथ मौजूद एक अन्य आरोपी हरे राम यादव भी पुलिस से बचकर भागने की कोशिश में घायल हुआ। दोनों को इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल ले जाया गया।
यह मामला 19 सितंबर की शाम का है। पुलिस के अनुसार जमुई-लखीसराय मार्ग के पास मदवा पहाड़ इलाके में एक नाबालिग लड़की और उसका नाबालिग साथी कोचिंग से लौट रहे थे। आरोप है कि रास्ते में कुछ लोगों ने दोनों को रोक लिया। इसके बाद उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की।
वीडियो में कई लोग दोनों किशोरों को घेरते हुए दिखाई देते हैं। पुलिस के अनुसार वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक न हो, इसके लिए पुलिस ने सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो को साझा करने से भी बचने की अपील की है।
पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट समेत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन भी किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक घटना में शामिल लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
जांच के दौरान पुलिस ने पहले तीन लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें नाबालिग भी शामिल बताए गए। इसके बाद मुख्य आरोपी नंदन यादव और हरे राम यादव तक पहुंचने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी की। मंगलवार को पुलिस टीम को दोनों के ठिकाने के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद कुंदर बैराज के आसपास तलाशी अभियान चलाया गया।
पुलिस के अनुसार तलाशी अभियान के दौरान आरोपियों ने भागने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि इस दौरान गोलीबारी की स्थिति बनी और जवाबी कार्रवाई में नंदन यादव के पैर में गोली लगी। हरे राम यादव भागने की कोशिश में घायल हो गया और उसके घुटने में चोट आई। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद अस्पताल पहुंचाया।
नंदन यादव की गिरफ्तारी के साथ ही मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। अधिकारियों के अनुसार उससे पूछताछ कर घटना में शामिल अन्य लोगों और सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने या फैलाने वालों की भूमिका के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। कुछ रिपोर्टों में मामले में सात या उससे अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है, जबकि पुलिस की शुरुआती आधिकारिक जानकारी में गिरफ्तारियों की संख्या अलग-अलग चरणों में बताई गई थी।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना का वीडियो किसने बनाया और उसे सोशल मीडिया पर किस तरह प्रसारित किया गया। अधिकारियों के अनुसार नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाला कंटेंट साझा करना कानूनी रूप से गंभीर मामला हो सकता है। इसी वजह से सोशल मीडिया पोस्ट और प्रोफाइल की भी जांच की जा रही है।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की पुरानी गतिविधियों और संभावित आपराधिक मामलों की जानकारी भी जुटानी शुरू की है। पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि कुछ आरोपियों के खिलाफ अवैध बालू खनन से जुड़े मामले पहले से दर्ज होने की जानकारी मिली है। हालांकि इन पुराने मामलों और मौजूदा घटना के बीच संबंध की अलग से जांच की जा रही है।
घटना के बाद बिहार में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हुई है। अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने घटना को लेकर बयान दिए हैं और सरकार तथा पुलिस की कार्रवाई पर अपने-अपने विचार रखे हैं। इन राजनीतिक दावों से अलग पुलिस जांच का मुख्य केंद्र घटना में शामिल लोगों की पहचान, उनकी भूमिका और कानूनी कार्रवाई है।
दोनों गिरफ्तार आरोपियों का अस्पताल में इलाज कराया गया है और पुलिस आगे की पूछताछ की तैयारी कर रही है। SIT घटना से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्ष जानकारी और आरोपियों से मिले तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। मामले में बाकी संदिग्धों की भूमिका और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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