Last updated: September 24th, 2026 at 08:54 am

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। राउत ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और डीलिमिटेशन को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान ऐसे समय आए हैं, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताए जाने का दावा किया गया है।
ज्ञानेश कुमार पर लगाए तीखे आरोप
संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने चुनाव आयोग को लेकर कहा कि वहां लोकतंत्र का “कसाईखाना” चल रहा है और ज्ञानेश कुमार को इसका मुखिया बताया।
राउत ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने ही कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराईं और उनकी बातों से उनके आरोपों को पुष्टि मिली है। हालांकि, ये राउत की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
राउत ने ज्ञानेश कुमार को “माफिया” और “लोकतंत्र का कॉन्ट्रैक्ट किलर” तक बताया और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए।
SIR और वोटर लिस्ट को लेकर क्या बोले राउत?
संजय राउत ने SIR की जरूरत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की जरूरत है तो इस पर सभी विपक्षी दलों के साथ सर्वदलीय बैठक में चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि SIR, डीलिमिटेशन और चुनाव आयुक्तों से जुड़े कानूनों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े होते हैं। राउत ने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जा रहे हैं।
उनके बयान के पीछे वह रिपोर्ट भी है, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराने की बात कही गई है। रिपोर्ट में Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और कुछ राज्यों में मतदाता नामों से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने रिपोर्ट में बताए गए मतभेदों की अलग व्याख्या दी है। आयोग की ओर से कहा गया कि SIR समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से और सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग के मुताबिक, विचारों में मतभेद होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
यानी एक तरफ विपक्षी नेता रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग का कहना है कि उसके फैसलों में किसी तरह का संस्थागत मतभेद नहीं था।
राउत ने की कार्रवाई की मांग
संजय राउत इससे पहले भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें पद से हटाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि SIR से जुड़े मामलों पर न्यायपालिका को भी संज्ञान लेना चाहिए। SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर चुनावी प्रक्रिया और आयोग की निर्णय प्रणाली को लेकर बहस का मुद्दा बन गया है।
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