Last updated: September 24th, 2026 at 03:15 pm

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिलों में 50 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। 23 सितंबर तक जारी आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ का पानी 576 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका था। कोसी और गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर दर्ज किया गया। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी हैं।
बाढ़ से प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, बक्सर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल शामिल हैं। इन इलाकों में बड़ी संख्या में गांव और निचले क्षेत्र बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं। कई जगहों पर सामान्य आवागमन बाधित हुआ है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
23 सितंबर को उपलब्ध आपदा प्रबंधन संबंधी जानकारी के अनुसार, 7,714 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए छह राहत शिविरों में पहुंचाया गया था। पानी से घिरे क्षेत्रों में लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए 391 नावें लगाई गई थीं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री और आवश्यक सेवाएं पहुंचाने का काम भी जारी रखा गया।
बाढ़ की स्थिति का एक प्रमुख कारण नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी है। 23 सितंबर के आंकड़ों में कोसी नदी बलतारा और कुर्सेला में तथा गंगा नदी कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बताई गई थी। इससे नदी किनारे बसे इलाकों में लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि, हर स्थान पर जलस्तर का रुझान एक जैसा नहीं है और कुछ स्टेशनों पर पानी घटने की स्थिति भी दर्ज की गई है।
24 सितंबर को जल संसाधन विभाग के दोपहर 2 बजे के आंकड़ों में बिहार के विभिन्न नदी स्टेशनों पर जलस्तर की स्थिति दर्ज की गई। इनमें कई स्थानों पर पानी खतरे के निशान से नीचे आ चुका था, जबकि कुछ क्षेत्रों में नदी का जलस्तर अभी भी निगरानी के दायरे में था। इससे पता चलता है कि बाढ़ की स्थिति जिले और नदी के अनुसार अलग-अलग बनी हुई है।
बिहार में राहत और बचाव अभियान के लिए राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है। इससे पहले जारी जानकारी के अनुसार अलग-अलग जिलों में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई थीं। इन टीमों का इस्तेमाल पानी में फंसे लोगों को निकालने, प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने और आपात स्थिति में बचाव अभियान चलाने के लिए किया जा रहा है।
बाढ़ का असर केवल घरों और सड़कों तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। पटना में गंगा का पानी घटने के बाद कई घाटों पर गाद, कचरा और जमा पानी की समस्या सामने आई है। इसके बाद नगर निकाय ने सफाई और मच्छर नियंत्रण अभियान शुरू किया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी पानी और मच्छर से होने वाली बीमारियों को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
मौसम की स्थिति भी बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। 23 सितंबर को जारी जानकारी में 23 से 26 सितंबर के बीच बिहार के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना बताई गई थी। ऐसे में प्रशासन नदियों के जलस्तर, बारिश और निचले इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
बिहार में इस बाढ़ के दौरान प्रभावित लोगों की संख्या करीब 50 लाख से अधिक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसी बीच राहत कार्यों के लिए आर्थिक सहयोग भी सामने आया है। 24 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री राहत कोष में अपने एक महीने के वेतन का योगदान दिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ मुलाकात के दौरान उन्होंने राहत कोष के लिए चेक सौंपा।
बाढ़ प्रभावित जिलों में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और जलस्तर में संभावित बदलाव पर नजर बनाए रखना है। नदियों का पानी अलग-अलग स्थानों पर अलग रफ्तार से घट-बढ़ रहा है, इसलिए प्रभावित इलाकों में स्थिति स्थानीय स्तर पर बदल सकती है। राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ स्वास्थ्य तथा स्वच्छता व्यवस्था पर भी निगरानी जरूरी बनी हुई है।
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