Last updated: September 27th, 2026 at 03:54 pm

बिहार में बाढ़ का संकट एक बार फिर गंभीर होता दिखाई दे रहा है। नेपाल के तराई और नदी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के बाद गंडक नदी में पानी का दबाव बढ़ गया है। रविवार को वाल्मीकिनगर बैराज से शाम करीब पांच बजे 4.79 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई। इससे पश्चिमी और उत्तर बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों ने नदी के जलस्तर और बैराजों से निकलने वाले पानी पर निगरानी बढ़ा दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, वाल्मीकिनगर क्षेत्र में गंडक का पानी कई गांवों तक पहुंच गया है। रोहुआ टोला, चकदहवा और झंडू टोला सहित कुछ इलाकों में पानी प्रवेश करने की जानकारी सामने आई है। रामनगर के दोन क्षेत्र की कई पंचायतों के करीब 22 गांवों का सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। इससे ग्रामीण इलाकों में आवागमन और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ा है।
गंडक नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। डुमरियाघाट में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 98 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने की सूचना है। रविवार को यहां जलस्तर 63.20 मीटर दर्ज किया गया। नदी का पानी तटवर्ती इलाकों के खेतों में फैलना शुरू हो गया है, जिससे खेती पर भी असर पड़ने की आशंका है।
सीतामढ़ी में भी बागमती नदी का जलस्तर बढ़ा है। ढेंग, सोनाखान और कटौझा में बागमती खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी शुरू कर दी है। फिलहाल जिले में व्यापक बाढ़ की स्थिति नहीं बताई गई है, लेकिन जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है।
केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार बिहार की कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर सामान्य से ऊपर या बाढ़ की स्थिति में बह रही हैं। गंडक नदी डुमरियाघाट पर गंभीर बाढ़ की स्थिति में है। बागमती नदी बेनीबाद और रुन्नीसैदपुर में गंभीर बाढ़ की स्थिति में दर्ज की गई है। वहीं कोसी नदी खगड़िया के बलतारा में गंभीर बाढ़ की स्थिति में है। गंगा, घाघरा और बूढ़ी गंडक समेत कई नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी जारी है।
बिहार में मौजूदा स्थिति का एक महत्वपूर्ण कारण नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश है। नेपाल में भारी बारिश के बाद वहां से आने वाले पानी का असर बिहार की नदियों में दिखाई देता है। जल संसाधन विभाग ने भी बैराजों से पानी के बहाव को लेकर निगरानी बढ़ाई है। रविवार सुबह वाल्मीकिनगर बैराज से 4.24 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी थी, जो शाम तक बढ़कर करीब 4.79 लाख क्यूसेक हो गई।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन को निचले इलाकों और नदी किनारे बसे गांवों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है। प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने से राहत और बचाव दलों के सामने भी चुनौती बढ़ सकती है। जिन इलाकों में पानी तेजी से बढ़ रहा है, वहां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और नदी या तेज बहाव वाले पानी के पास नहीं जाने की सलाह दी जा रही है।
बिहार में यह स्थिति ऐसे समय बनी है जब राज्य के कई हिस्से पहले से ही बाढ़ और जलजमाव से प्रभावित रहे हैं। सितंबर के दौरान गंगा, गंडक, कोसी, बागमती और अन्य नदियों के जलस्तर में कई बार उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। अब नेपाल से आने वाले अतिरिक्त पानी के कारण एक बार फिर निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है।
प्रशासन की प्राथमिकता नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी, तटबंधों की सुरक्षा और संभावित प्रभावित इलाकों में राहत-बचाव की तैयारी बनाए रखना है। आने वाले घंटों में बैराजों से पानी के बहाव और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश की स्थिति के आधार पर बाढ़ का असर आगे बढ़ सकता है। इसलिए प्रभावित जिलों में प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए सतर्क रहना महत्वपूर्ण है।
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