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दिल्ली-NCR में हालिया दुष्कर्म मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

  दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हाल में सामने आए यौन अपराधों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार
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    दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हाल में सामने आए यौन अपराधों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई और कहा कि पार्क, बस तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों को खराब रोशनी, कमजोर निगरानी या पर्याप्त गश्त की कमी के कारण जोखिम वाले क्षेत्र में बदलने नहीं दिया जा सकता।

     

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने की। अदालत ने दिल्ली-NCR में हाल में सामने आए कई यौन अपराधों की रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी से जुड़े सवाल उठाए। कोर्ट ने मामले को स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका के रूप में आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।

     

    सुप्रीम कोर्ट के सामने जिन घटनाओं का उल्लेख हुआ, उनमें 4 अगस्त को ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही एक स्लीपर बस में 16 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला भी शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, लड़की ने बस में यात्रा के दौरान चालक और परिचालक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। बाद में उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में छोड़ दिया गया। इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

     

    अदालत ने दिल्ली के एक पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले का भी उल्लेख किया। यह घटना 21 सितंबर को दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, तीन आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताकर लड़की और उसके दोस्त को रोका और बाद में लड़की को पार्क के एक सुनसान हिस्से में ले गए। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

     

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल घटना के बाद चिंता व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया। अदालत के अनुसार, अपराध की रोकथाम, सार्वजनिक व्यवस्था और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

     

    अदालत ने सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था में कई बुनियादी पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया। इनमें पर्याप्त रोशनी, CCTV और अन्य निगरानी व्यवस्था, पुलिस की नियमित गश्त तथा सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा उपाय शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि इन सुविधाओं की कमी के कारण सार्वजनिक स्थानों को महिलाओं और बच्चों के लिए असुरक्षित नहीं बनने दिया जा सकता।

     

    सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन भी हुए हैं। हाल की घटनाओं के बाद छात्रों और अन्य लोगों ने बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त रोशनी और पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने जैसी मांगें उठाई हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से भी संवेदनशील इलाकों में गश्त और दृश्य पुलिसिंग बढ़ाने की जानकारी सामने आई है।

     

    अदालत ने 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया मामले का भी संदर्भ दिया और हाल की घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त की। हालांकि मौजूदा मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग चल रही है तथा आरोपों का अंतिम निर्धारण संबंधित अदालतों में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

     

    अब सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही में यह देखा जाएगा कि दिल्ली-NCR में सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में कहां-कहां कमियां हैं और उन्हें दूर करने के लिए संबंधित प्रशासन तथा कानून-व्यवस्था एजेंसियों की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

     

    घटनाओं के बाद अदालत का हस्तक्षेप सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को न्यायिक निगरानी के दायरे में ले आया है। आगे की सुनवाई में सुरक्षा उपायों, अधिकारियों की जिम्मेदारी और घटनाओं की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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