Last updated: September 29th, 2026 at 10:05 am

दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने इस बार पहले से कई कदम उठाने की तैयारी की है। 28 सितंबर को हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद राजधानी में वाहनों, निर्माण कार्यों, सड़क की धूल और कार्यालयों से होने वाले यातायात को नियंत्रित करने के लिए कई उपायों की घोषणा की गई। इनमें 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम, पार्किंग शुल्क बढ़ाना और निर्माण एवं तोड़फोड़ की गतिविधियों पर चरणबद्ध रोक शामिल है।
सरकार की योजना के अनुसार सर्दियों के दौरान सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को कम करने के लिए 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके साथ ही कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया जाएगा, ताकि सुबह और शाम के व्यस्त समय में सड़कों पर वाहनों की संख्या को कम किया जा सके। इन उपायों का उद्देश्य कार्यालय आने-जाने वाले लोगों की संख्या और उससे होने वाले वाहन उत्सर्जन को कम करना है।
प्रदूषण नियंत्रण योजना में निर्माण और तोड़फोड़ के कामों को भी शामिल किया गया है। धूल पैदा करने वाली बाहरी निर्माण गतिविधियों पर 1 नवंबर से 31 जनवरी तक प्रतिबंध रहेगा। इसके बाद प्रदूषण की सबसे गंभीर अवधि को देखते हुए 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर व्यापक रोक लागू की जाएगी।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी कई कदम प्रस्तावित हैं। 1 अक्टूबर से वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUCC के बिना वाहनों को ईंधन देने के खिलाफ अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के लिए दिल्ली के करीब 500 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट पहचान प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। वैध प्रमाणपत्र नहीं रखने वाले वाहनों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
1 नवंबर से दिल्ली में बाहर से आने वाले ऐसे पेट्रोल और डीजल वाहनों पर भी प्रतिबंध लगाने की योजना है जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते। CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस व्यवस्था से अलग रखा गया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की आवाजाही को कम करना है।
निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना भी बनाई गई है। इसके साथ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। मेट्रो और बस सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ाने तथा लोगों को निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है।
दिल्ली में सड़क की धूल और निर्माण स्थलों से निकलने वाले प्रदूषण पर निगरानी भी बढ़ाई जाएगी। निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए वेब-कैमरों और अन्य तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों को प्रदूषण के हॉटस्पॉट पर नियमित निगरानी रखने और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।
कचरा जलाने और औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए भी निगरानी बढ़ाने की योजना है। अलग-अलग विभागों को अपने क्षेत्र में प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई करने और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया है। प्रदूषण से संबंधित शिकायतों की निगरानी में तकनीक और AI आधारित व्यवस्था का इस्तेमाल करने की भी योजना सामने आई है।
दिल्ली सरकार की योजना केवल राजधानी तक सीमित नहीं है। दिल्ली-NCR में प्रदूषण के कई स्रोत एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण पड़ोसी क्षेत्रों के साथ समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है। वाहन, उद्योग, निर्माण, सड़क की धूल और अन्य स्रोतों पर क्षेत्रीय स्तर पर कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बार सरकार ने प्रदूषण का स्तर बहुत खराब होने के बाद कदम उठाने के बजाय पहले से प्रतिबंध लागू करने की व्यवस्था तैयार की है। शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण योजना हर वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू करने का ढांचा बनाया गया है। हालांकि अलग-अलग गतिविधियों पर प्रतिबंध की अवधि उनके प्रकार और प्रदूषण की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता पर मौसम, स्थानीय उत्सर्जन और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषकों का असर पड़ता है। ऐसे में सरकार की नई व्यवस्था में वाहनों, निर्माण, कार्यालयों, पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन समेत कई क्षेत्रों को एक साथ शामिल किया गया है। आने वाले महीनों में इन उपायों के लागू होने के बाद उनकी निगरानी और प्रदूषण के वास्तविक स्तर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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