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बिहार में गंडक नदी का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर, उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा

बिहार में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है। नेपाल
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बिहार में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है। नेपाल के गंडक बेसिन और बिहार में हुई लगातार बारिश के बाद नदी में पानी का प्रवाह तेजी से बढ़ा है। पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की सूचना है। कई स्थानों पर तटबंधों पर दबाव बढ़ने के साथ कटाव, सीपेज और क्षति की स्थिति सामने आई है।

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    बिहार जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर की सुबह बगहा में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया। वहीं थकराहा और खड्डा समेत गंडक के कई निगरानी केंद्रों पर भी पानी चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर रहा। हाजीपुर में गंडक का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर और बढ़ती प्रवृत्ति में दर्ज किया गया।

     

    इससे पहले वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने की स्थिति बनी थी। 29 सितंबर को बैराज पर लगभग 5.43 लाख क्यूसेक का डिस्चार्ज दर्ज किया गया था। नदी का प्रवाह लंबे समय तक पांच लाख क्यूसेक से ऊपर रहने के कारण पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली सहित कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया था।

     

    गंडक के तेज बहाव का असर तटबंधों पर भी दिखाई दे रहा है। पश्चिम चंपारण में चंपारण तटबंध के कुछ हिस्सों में क्षति की सूचना मिली है। कई जगह सीपेज और पाइपिंग की समस्या सामने आने के बाद जल संसाधन विभाग के अभियंता और कर्मचारी सुरक्षात्मक कार्य में लगाए गए हैं। अधिकारियों की टीम कमजोर स्थानों पर निगरानी कर रही है और आवश्यकतानुसार तटबंध को मजबूत करने का काम किया जा रहा है।

     

    पूर्वी चंपारण में भी गंडक से जुड़ी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। अरerाज क्षेत्र में रिंग बांध टूटने के बाद आसपास के निचले इलाकों और गांवों में पानी पहुंचने की खबर सामने आई है। कुछ क्षेत्रों में घरों और खेतों में पानी भरने के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दलों को सक्रिय किया गया है।

     

    बिहार में केवल गंडक ही नहीं, बल्कि कई अन्य नदियों का जलस्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है। सरकारी रियल-टाइम निगरानी आंकड़ों के अनुसार गंगा, कोसी, घाघरा, बागमती और बूढ़ी गंडक के कई केंद्रों पर पानी चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया। पटना के गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से ऊपर और बढ़ती प्रवृत्ति में दर्ज हुई, जबकि भागलपुर के सुल्तानगंज में भी जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर रहा।

     

    लगातार ऊंचे जलस्तर के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होने की स्थिति में नावों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने से फसल को नुकसान का खतरा भी बना हुआ है। लंबे समय तक जलजमाव रहने पर पशुपालन और स्थानीय बाजार व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

     

    प्रशासन और जल संसाधन विभाग की प्राथमिकता फिलहाल कमजोर तटबंधों की निगरानी, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और प्रभावित आबादी तक राहत पहुंचाना है। जिन स्थानों पर पानी तेजी से बढ़ रहा है, वहां स्थानीय प्रशासन को अलर्ट रखा गया है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

     

    नेपाल में हुई भारी बारिश को गंडक में अचानक बढ़े पानी का प्रमुख कारण बताया गया है। सीमावर्ती जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का असर नदी के बहाव पर तेजी से पड़ता है, जिससे उत्तर बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। मौजूदा स्थिति में नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखना प्रशासन के लिए जरूरी बना हुआ है।

     

    उत्तर बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ का दबाव बना हुआ है। गंडक के कुछ निगरानी केंद्रों पर जलस्तर घटने के संकेत भी मिले हैं, लेकिन कई स्थानों पर पानी अभी भी खतरे के स्तर से ऊपर है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ तटबंधों की सुरक्षा और नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी जारी है।

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