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UPSC में 4 बार मिली हार, शादी और पैसों का दबाव भी नहीं रोक सका सपना; प्रिया ने हासिल की 232वीं रैंक

UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन इस सफर में कई बार असफलता के
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UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन इस सफर में कई बार असफलता के बाद भी डटे रहना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। बिहार की प्रिया कुमारी की कहानी इसी जिद और लगातार मेहनत की मिसाल है। चार बार असफल होने, परिवार की ओर से शादी के दबाव और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद प्रिया ने तैयारी नहीं छोड़ी। आखिरकार UPSC CSE 2025 में 232वीं रैंक हासिल कर उन्होंने अपने अफसर बनने का सपना पूरा किया।

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    12वीं में 94%, CS में हासिल की ऑल इंडिया रैंक 21

    प्रिया की शुरुआती पढ़ाई बिहार के पटना के एक गांव के सरकारी स्कूल से हुई। पढ़ाई में अच्छी रहीं प्रिया ने 12वीं में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने कंपनी सेक्रेटरी यानी CS की पढ़ाई की और इसमें ऑल इंडिया रैंक 21 हासिल की।

    CS में मिली सफलता ने उन्हें यह भरोसा दिया कि सही रणनीति और लगातार मेहनत के दम पर बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। इसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू करने का फैसला लिया।

    शादी का दबाव आया, लेकिन लक्ष्य से पीछे नहीं हटीं

    UPSC की तैयारी के दौरान प्रिया के सामने पढ़ाई के अलावा पारिवारिक दबाव भी था। उनके दादा और पिता चाहते थे कि वह शादी कर लें। ऐसे समय में प्रिया ने अपने परिवार के सामने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की। उन्होंने तय किया कि UPSC की तैयारी का खर्च वह अपनी नौकरी की कमाई से खुद उठाएंगी। उनकी मां और भाई ने भी उनका साथ दिया। परिवार को समझाने के बाद प्रिया ने अपनी तैयारी पर फोकस जारी रखा।

    चार बार असफलता, हर बार बदली रणनीति

    प्रिया का UPSC सफर आसान नहीं रहा। पहला प्रयास उन्होंने पूरी तैयारी के बिना किया था। इसके बाद उन्होंने गंभीरता से तैयारी शुरू की, लेकिन 2023 और 2024 में प्रीलिम्स में वह सिर्फ एक-दो अंकों के अंतर से सफलता से चूक गईं। लगातार चार प्रयासों में असफलता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। हर बार अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और तैयारी की रणनीति में बदलाव किया।

    तैयारी के दौरान उन्हें यह भी महसूस हुआ कि बहुत ज्यादा स्टडी मटीरियल उनके लिए मददगार होने के बजाय बोझ बन रहा है। इसके बाद उन्होंने कई पुरानी किताबें बेच दीं और करीब 25 से 30 जरूरी किताबों पर अपना फोकस सीमित कर लिया। उनका जोर ज्यादा किताबें पढ़ने के बजाय चुनी हुई सामग्री को बार-बार पढ़ने और अच्छी तरह समझने पर रहा। उन्होंने सोशियोलॉजी को ऑप्शनल विषय चुना और स्टैटिक विषयों पर भी विशेष ध्यान दिया।

    पांचवें प्रयास में मिली मंजिल

    चार बार असफल होने के बाद भी प्रिया ने तैयारी जारी रखी। आखिरकार उनके पांचवें प्रयास में मेहनत रंग लाई और UPSC CSE 2025 में 232वीं रैंक हासिल हुई। इंटरव्यू में उन्हें 194 अंक मिले। UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने BPSC प्रीलिम्स भी पास किया।

    प्रिया की कहानी बताती है कि सफलता हमेशा पहली या दूसरी कोशिश में नहीं मिलती। असफलताओं से सीखना, रणनीति बदलना और लक्ष्य पर लगातार टिके रहना भी सफलता की प्रक्रिया का हिस्सा है। परिवार की उम्मीदों, शादी के दबाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच प्रिया ने अपने सपने को नहीं छोड़ा और आखिरकार उसे हासिल कर लिया।

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