Last updated: October 8th, 2026 at 11:05 am

जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के चरार-ए-शरीफ में बुधवार को सूफी संत हज़रत शेख नूरुद्दीन नूरानी (RA) की दरगाह पर सालाना उर्स की शुरुआत धार्मिक रस्मों के साथ हुई। इस दौरान ‘पोशाक बंदी’ की पारंपरिक रस्म अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और अनुयायियों ने हिस्सा लिया।
नंद ऋषि की दरगाह पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हज़रत शेख नूरुद्दीन नूरानी (RA) को कश्मीर में ‘नंद ऋषि’, ‘अलमदार-ए-कश्मीर’ और ‘शेख-उल-आलम’ के नाम से भी जाना जाता है। उनकी सूफी शिक्षाओं और आध्यात्मिक संदेश का कश्मीर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान माना जाता है।
उर्स की शुरुआत के मौके पर दरगाह के पवित्र मज़ार पर चादर और पोशाक बदलने की रस्म पूरी की गई। इस धार्मिक आयोजन में दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और दरगाह पर प्रार्थना की।
श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने किए इंतजाम
शेख-उल-आलम का सालाना उर्स जम्मू-कश्मीर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु चरार-ए-शरीफ पहुंचते हैं। इसे देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से आयोजन को सुचारू बनाए रखने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।
प्रशासन ने संबंधित विभागों को श्रद्धालुओं के लिए परिवहन, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए दरगाह और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।
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