Last updated: October 19th, 2026 at 06:28 am

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करने के लिए निर्वाचन विभाग ने घर-घर जाकर सत्यापन करने की तैयारी तेज कर दी है। जिन लोगों के नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उनकी पहचान करने और पंजीकरण में सहायता देने के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाएं और आगामी चुनावों में मतदान करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, बीएलओ घर-घर जाकर ऐसे नागरिकों की जानकारी जुटाएंगे, जिनके नाम मसौदा सूची में नहीं मिल रहे हैं। पात्र पाए जाने वाले लोगों को आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी और आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें मतदाता सूची में अपना नाम खोजने या आवेदन जमा करने में कठिनाई हो रही है।
दिल्ली में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नामों की संख्या को लेकर चर्चा तेज हुई है। मसौदा सूची में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम शामिल नहीं थे, जिन्हें अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि वाली श्रेणियों में रखा गया था। ऐसे मामलों की जांच और पात्र नागरिकों को दोबारा सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन अधिकारियों पर पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
निर्वाचन विभाग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 की व्यवस्था की है। जिन पात्र नागरिकों का नाम मसौदा मतदाता सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए नागरिक निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं या अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं। आवेदन जमा करने से पहले अपनी पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी जांचना जरूरी है।
इस अभियान में विशेष शिविरों की भी भूमिका महत्वपूर्ण है। अक्टूबर में 18 और 25 तारीख को आयोजित विशेष शिविरों के माध्यम से लोगों को मतदाता सूची में नाम शामिल कराने और अपनी स्थिति की जानकारी लेने का अवसर दिया गया। शिविरों में बीएलओ से सीधे संपर्क करके आवेदन संबंधी समस्याओं का समाधान प्राप्त किया जा सकता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि घर-घर सत्यापन और शिविरों के संयुक्त प्रयास से अधिक पात्र नागरिकों तक पहुंच बनाई जा सकेगी।
हालांकि, पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कुछ मतदाताओं ने शिकायत की है कि उनके नाम गलत तरीके से अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत दर्ज कर दिए गए। कुछ मामलों में लंबे समय से मतदान कर रहे लोगों को भी अपने नाम की स्थिति स्पष्ट करने के लिए दोबारा दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़े हैं। ऐसे मामलों में निर्वाचन विभाग के लिए जरूरी है कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और पात्र मतदाताओं को उचित अवसर दिया जाए।
मतदाता सूची में नाम न मिलने पर नागरिकों को घबराने के बजाय पहले आधिकारिक वेबसाइट पर अपना विवरण जांचना चाहिए। यदि नाम शामिल नहीं है, तो निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन जमा करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति का नाम गलत कारण से हटाया गया है या उसके विवरण में त्रुटि है, तो उसे संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करके उचित प्रक्रिया के तहत सुधार की मांग करनी चाहिए।
दिल्ली में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा 30 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित की गई है। इसके बाद प्राप्त आवेदनों और आपत्तियों का निस्तारण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है। इसलिए जिन नागरिकों को अपने नाम या विवरण में किसी प्रकार की समस्या दिखाई देती है, उन्हें अंतिम तारीख तक इंतजार नहीं करना चाहिए।
निर्वाचन विभाग की इस पहल का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और समावेशी बनाना है। घर-घर सत्यापन, विशेष शिविर और ऑनलाइन आवेदन की सुविधाओं से नागरिकों को राहत मिल सकती है। हालांकि, अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पात्र नागरिकों के आवेदन समय पर निपटाए जाएं और गलत प्रविष्टियों से जुड़ी शिकायतों का उचित समाधान किया जाए।
![]()
Comments are off for this post.