Human Live Media

HomeNewsदिल्ली में रोजाना 15 हजार टन कचरा पैदा होने की चुनौती, सफाई के लिए तैनात होंगी 1,000 मशीनें

दिल्ली में रोजाना 15 हजार टन कचरा पैदा होने की चुनौती, सफाई के लिए तैनात होंगी 1,000 मशीनें

  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ती आबादी और शहरी गतिविधियों के बीच कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
images (36)

 

Table of Contents

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ती आबादी और शहरी गतिविधियों के बीच कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। शहर में प्रतिदिन लगभग 15,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, लेकिन पहले उपलब्ध व्यवस्था के तहत इसमें से केवल 6,000 से 7,000 मीट्रिक टन कचरे का ही प्रसंस्करण हो पाता था। इस समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने और कचरा संग्रहण की क्षमता बढ़ाने की दिशा में नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के सरिता विहार में नए कचरा स्थानांतरण केंद्र का उद्घाटन किया और शहरभर में 1,000 यांत्रिक कचरा उठाने वाली मशीनें तैनात करने की योजना को आगे बढ़ाया।

     

    सरकार की योजना के तहत ये मशीनें दिल्ली नगर निगम के सभी 250 वार्डों में उपलब्ध कराई जाएंगी। पहले चरण में 50 मशीनों को रवाना किया गया है। इन बैटरी से चलने वाली मशीनों का उपयोग सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर बिखरे छोटे कचरे को इकट्ठा करने के लिए किया जाएगा। इससे सफाई कर्मचारियों को काम में सहायता मिलेगी और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में कचरा उठाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।

     

    सरिता विहार में स्थापित फिक्स्ड कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे केंद्रों पर विभिन्न इलाकों से एकत्रित कचरे को व्यवस्थित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है, जिससे उसके परिवहन और आगे के प्रसंस्करण में मदद मिलती है। सरकार का उद्देश्य केवल सड़कों से कचरा हटाना नहीं, बल्कि कचरे के संग्रहण से लेकर उसके अंतिम निपटान तक की पूरी व्यवस्था को मजबूत करना है।

     

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि दिल्ली में सफाई और कचरा प्रबंधन लंबे समय से बड़ी चुनौती रहे हैं। प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे और उपलब्ध प्रसंस्करण क्षमता के बीच अंतर के कारण लैंडफिल स्थलों पर दबाव बढ़ता है। इस समस्या को कम करने के लिए नए कचरा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने, मौजूदा सुविधाओं की क्षमता बढ़ाने और कचरे से ऊर्जा बनाने वाली परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

     

    सरकार ने घर-घर कचरा संग्रहण और उसके परिवहन के लिए वाहनों की व्यवस्था को भी मजबूत करने की घोषणा की है। इस अभियान के तहत 35 महिला चालकों को नियुक्त किया गया है, जो कचरा संग्रहण और परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का संचालन करेंगी। इसके अतिरिक्त, दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में कचरा परिवहन के लिए ऑटो-टिपर, ई-रिक्शा, छोटे मालवाहक वाहन और कचरा कॉम्पैक्टर उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

     

    कचरे के अलग-अलग प्रकारों को अलग रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग जमा करने से उसके प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में आसानी होती है। पुराने कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल करने या पुनर्चक्रण के लिए एकत्र करने के उद्देश्य से मेट्रो स्टेशनों के आसपास ‘अर्पण’ केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, धार्मिक सामग्री और टूटी हुई मूर्तियों को सामान्य कचरे से अलग एकत्र करने के लिए विशेष संग्रहण केंद्र बनाने की योजना भी आगे बढ़ाई जा रही है।

     

    दिल्ली में कचरा प्रबंधन की समस्या केवल सफाई कर्मचारियों या नगर निगम की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकना, गीले और सूखे कचरे को मिलाना तथा धार्मिक सामग्री को नालों या जलाशयों में डालना भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे कचरा निर्धारित स्थानों पर ही डालें और घरों में ही कचरे को अलग-अलग रखें।

     

    विशेषज्ञों के अनुसार, मशीनों की तैनाती से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई में सुधार हो सकता है, लेकिन शहर की कचरा समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब संग्रहण, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निपटान की सभी व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से काम करें। इसके लिए नियमित निगरानी, पर्याप्त संसाधन और नागरिकों की भागीदारी आवश्यक है।

     

    दिल्ली सरकार की इस पहल से सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे को कम करने की उम्मीद है। हालांकि, योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मशीनें कितनी प्रभावी ढंग से तैनात होती हैं और प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे का कितना हिस्सा उचित तरीके से संसाधित किया जा पाता है।

    Loading

    Comments are off for this post.