Last updated: October 24th, 2026 at 12:34 pm

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार के एक फैसले की केंद्र सरकार ने सराहना की है। राज्य सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन पर वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) की दरों में कटौती की है। इस कदम से एयरलाइंस की परिचालन लागत कम करने और हवाई किरायों पर दबाव घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री विजय की तारीफ की। उन्होंने कहा कि हवाई यात्रा को अधिक किफायती बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय जरूरी है।
चेन्नई में 29% से घटाकर 16% हुआ VAT
तमिलनाडु सरकार के फैसले के मुताबिक, चेन्नई में ATF पर VAT की दर 29 प्रतिशत से घटाकर 16 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं, राज्य के अन्य हवाई अड्डों पर यह दर घटाकर 1 प्रतिशत कर दी गई है।
इस कटौती से तमिलनाडु के हवाई अड्डों से परिचालन करने वाली एयरलाइंस को ईंधन पर लगने वाले कर में राहत मिलने की उम्मीद है। विमानन कंपनियों के लिए ATF एक बड़ा खर्च होता है, इसलिए इसकी कीमत और उस पर लगने वाला टैक्स उड़ानों की लागत को प्रभावित करता है।
केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने क्या कहा?
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर तमिलनाडु सरकार के फैसले की सराहना की। उन्होंने ATF पर VAT घटाने के कदम को विमानन क्षेत्र के लिए स्वागत योग्य बताया और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को धन्यवाद दिया।
मंत्री ने कहा कि हवाई यात्रा को ज्यादा किफायती बनाने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने यात्रियों के हितों को साझा प्राथमिकता बताते हुए इस तरह के समन्वय की जरूरत पर जोर दिया।
गौरतलब है कि ATF वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे से बाहर है। ऐसे में राज्य सरकारें इस पर अपने निर्धारित नियमों के अनुसार VAT लगाती हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में विमान ईंधन पर कर की दरों में अंतर देखने को मिलता है।
एयरलाइंस की लागत में ईंधन की बड़ी हिस्सेदारी
विमानन कंपनियों के परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी काफी अधिक होती है। आम तौर पर यह कुल परिचालन लागत का करीब 30 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है। ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने पर एयरलाइंस के खर्च पर सीधा असर पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक तनाव और उड़ानों के मार्ग में बदलाव जैसी परिस्थितियां विमानन कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं। ऐसे माहौल में ATF पर VAT घटने से एयरलाइंस को कुछ राहत मिलने की संभावना है।
भारतीय एयरलाइंस पर दोहरा दबाव
भारतीय विमानन कंपनियों के सामने ईंधन की कीमतों के अलावा रुपये की कमजोरी और कुछ अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों पर प्रतिबंधों जैसी चुनौतियां भी हो सकती हैं। रुपये के कमजोर होने से डॉलर में होने वाले खर्च महंगे पड़ सकते हैं। वहीं, हवाई क्षेत्र बंद होने या मार्ग बदलने के कारण कुछ उड़ानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ सकता है, जिससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत बढ़ती है।
इन परिस्थितियों में विमान ईंधन पर टैक्स में कटौती एयरलाइंस के लिए राहत का एक माध्यम बन सकती है। हालांकि, इसका असर टिकटों के किराये पर कितना पड़ेगा, यह ईंधन की कीमतों, अन्य परिचालन खर्चों और विमानन कंपनियों की व्यावसायिक नीतियों पर भी निर्भर करेगा।
यात्रियों को मिल सकती है राहत
तमिलनाडु सरकार के इस फैसले से एयरलाइंस की लागत पर दबाव कम होने की उम्मीद है। यदि कंपनियों को परिचालन खर्च में पर्याप्त राहत मिलती है, तो इससे हवाई किरायों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, VAT में कटौती का मतलब यह नहीं है कि टिकटों के दाम तत्काल कम हो जाएंगे। किराये पर कई कारकों का असर पड़ता है। फिलहाल इस फैसले को विमानन क्षेत्र के लिए राहत देने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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