Last updated: October 25th, 2026 at 04:19 am

उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे कम दबाव के क्षेत्र और संभावित चक्रवाती तूफान के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 28 अक्टूबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है, जबकि 29 अक्टूबर को कुछ जिलों में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका है। मौसम में इस बदलाव से दिन और रात के तापमान में गिरावट आने के भी आसार हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र मजबूत होकर गहरे दबाव और फिर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके बाद मौसम तंत्र के उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटों की ओर बढ़ने का अनुमान है। इसी मौसमी प्रणाली का प्रभाव पूर्वी भारत के कई राज्यों के साथ उत्तर प्रदेश में भी दिखाई दे सकता है। हालांकि, तूफान की दिशा और तीव्रता में बदलाव होने पर बारिश के क्षेत्र तथा समय में भी परिवर्तन संभव है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 28 अक्टूबर से सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और भदोही समेत पूर्वांचल के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। वहीं, 29 अक्टूबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मध्यांचल के कई जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिल सकता है।
29 अक्टूबर के लिए चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, रायबरेली, अमेठी और सुल्तानपुर सहित कई जिलों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने की जरूरत है। ये पूर्वानुमान हैं; वास्तविक स्थिति जिले और समय के अनुसार बदल सकती है।
लखनऊ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में फिलहाल मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने की संभावना है। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। राजधानी में दिन के समय धूप और रात में अपेक्षाकृत ठंडक महसूस होने के आसार हैं। आने वाले दिनों में बारिश का प्रभाव बढ़ने पर तापमान में और गिरावट आ सकती है।
मौसम में इस बदलाव का असर किसानों पर भी पड़ सकता है। अक्टूबर का अंतिम सप्ताह धान की कटाई, फसल को सुखाने और अनाज को सुरक्षित रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में अचानक बारिश होने पर खेतों में खड़ी फसल और कटाई के बाद खुले में रखे धान को नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और कटाई के बाद उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था करें। खेतों में पानी जमा होने की आशंका वाले इलाकों में भी पहले से तैयारी करना उपयोगी रहेगा।
बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा भी लोगों की चिंता बढ़ा सकता है। मौसम खराब होने पर खुले मैदानों, पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर ढांचों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित पक्के भवन या बंद वाहन में शरण लेना बेहतर है। वाहन चालकों को भी बारिश के समय गति नियंत्रित रखने और सड़क पर पानी जमा होने वाले स्थानों पर सावधानी बरतने की जरूरत है।
प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए भी मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए तैयारी रखना महत्वपूर्ण है। निचले इलाकों में जल निकासी की व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और ग्रामीण सड़कों की स्थिति पर नजर रखने से लोगों को होने वाली परेशानी कम की जा सकती है। स्थानीय स्तर पर जारी चेतावनियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाना भी जरूरी होगा।
उत्तर प्रदेश में मौसम का अगला बड़ा बदलाव 28 अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है। पूर्वांचल और मध्यांचल के कई जिलों में बारिश, तेज हवाओं और वज्रपात का खतरा बना रह सकता है। लोगों और किसानों को सलाह है कि वे मौसम विभाग की ताजा जानकारी पर नजर रखें और उसके अनुसार अपनी यात्रा, कृषि कार्य तथा अन्य गतिविधियों की योजना बनाएं।
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