Last updated: October 25th, 2026 at 04:09 am

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक गाय की मौत के बाद दो गांवों के करीब 450 लोगों को एहतियात के तौर पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई। बताया जा रहा है कि दुर्गा पूजा के दौरान इसी गाय के दूध से चरणामृत तैयार किया गया था, जिसे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया था। बाद में गाय की तबीयत बिगड़ने और उसकी मौत होने की खबर सामने आई, जिसके बाद ग्रामीणों में रेबीज संक्रमण की आशंका को लेकर चिंता फैल गई। हालांकि, गाय में रेबीज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
यह मामला गोरखपुर जिले के गोला ब्लॉक स्थित डाड़ी खास गांव का है। जानकारी के अनुसार, दुर्गा पूजा के दौरान गाय के दूध से चरणामृत तैयार कर श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया था। इस दूध का इस्तेमाल केवल पूजा के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ स्थानीय दुकानों और घरों में भी होता था। ऐसे में गाय की मौत की खबर सामने आने के बाद डाड़ी खास और पड़ोसी गोविंदपुर गांव के लोगों की चिंता बढ़ गई।
गाय के मालिक के मुताबिक, पशु की तबीयत पिछले एक-दो दिनों से खराब थी। मंगलवार को उसकी हालत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद उसे निजी पशु चिकित्सकों और स्थानीय पशु चिकित्सा केंद्र में दिखाया गया। चिकित्सकों ने लक्षणों के आधार पर आशंका जताई कि गाय को किसी आवारा कुत्ते ने काटा हो सकता है। बताया गया कि गाय का व्यवहार असामान्य हो गया था और वह भौंकने जैसी हरकतें करने लगी थी। मंगलवार शाम को उसकी मौत हो गई।
गाय की मौत के बाद उन लोगों में डर बढ़ गया, जिन्होंने उसके दूध से बना चरणामृत ग्रहण किया था। इसके बाद ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और स्वास्थ्य विभाग से सलाह तथा टीकाकरण की मांग की। अधिकारियों के अनुसार, 20 अक्टूबर को करीब 50 लोगों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाई। इसके बाद 21 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डाड़ी खास गांव में शिविर लगाया, जहां लगभग 400 लोगों को टीका दिया गया। इस तरह कुल टीकाकरण कराने वालों की संख्या करीब 450 बताई गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को चिकित्सकीय सलाह लेने और जरूरत के अनुसार टीकाकरण का निर्धारित कार्यक्रम पूरा करने की सलाह दी। स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों ने कहा कि लोगों की आशंकाओं को देखते हुए टीकाकरण की व्यवस्था की गई और जरूरत पड़ने पर आगे भी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
हालांकि, इस घटना को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि गाय में रेबीज की पुष्टि नहीं हुई थी। पशु चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि केवल असामान्य व्यवहार या मौत के आधार पर रेबीज की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए उचित पशु चिकित्सा जांच और आवश्यक परीक्षण की जरूरत होती है। इसलिए घटना को रेबीज संक्रमण का प्रमाण मानने के बजाय संभावित जोखिम की आशंका के रूप में देखा जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य रूप से दूध पीने से रेबीज फैलना संक्रमण का स्थापित मार्ग नहीं माना जाता। फिर भी यदि किसी व्यक्ति को संक्रमित पशु की लार या अन्य संभावित संक्रामक पदार्थ के सीधे संपर्क का संदेह हो, तो उसे देरी किए बिना चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना चाहिए। एंटी-रेबीज वैक्सीन की जरूरत और उसकी खुराक का समय डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय किया जाना चाहिए।
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