Last updated: October 25th, 2026 at 04:13 am

दिल्ली में मानसून के दौरान यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में होने वाली बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सरकार ने यमुना के संवेदनशील हिस्से में लगभग 99 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाने की परियोजना को मंजूरी दी है। इसके साथ ही राजधानी की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने और नालों से निकाली गई गाद के वैज्ञानिक निपटान के लिए कुल 622 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। सरकार का उद्देश्य बाढ़ के जोखिम को कम करना, जलभराव की समस्या से राहत दिलाना और शहर के ड्रेनेज सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाना है।
इस संबंध में निर्णय शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 40वीं बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश वर्मा ने की। अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में यमुना के किनारे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, नालों की सफाई और गाद के उचित निपटान जैसे मुद्दों पर विचार किया गया। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों को राहत मिल सकती है।
प्रस्तावित बाढ़ सुरक्षा दीवार लगभग 4.7 किलोमीटर लंबी होगी। इसका निर्माण मैगजीन रोड ड्रेन से ओल्ड रेलवे ब्रिज तक यमुना के संवेदनशील हिस्से में किया जाएगा। यह दीवार प्रबलित सीमेंट कंक्रीट यानी आरसीसी से बनाई जाएगी और इसकी ऊंचाई लगभग छह से सात फीट रखने का प्रस्ताव है। परियोजना पर करीब 99 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सरकार के अनुसार, यमुना का जलस्तर बढ़ने पर नदी का पानी आसपास के निचले इलाकों, सड़कों और रिहायशी क्षेत्रों में प्रवेश करने लगता है। इससे लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं और यातायात तथा रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। प्रस्तावित दीवार का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में बाढ़ के पानी के प्रवेश का जोखिम कम करना है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव निर्माण की तकनीकी योजना, आसपास की जल निकासी व्यवस्था और नदी के जलस्तर पर निर्भर करेगा।
दिल्ली में बाढ़ सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत वर्ष 2023 में भी गंभीर रूप से महसूस की गई थी, जब यमुना का जलस्तर ओल्ड रेलवे ब्रिज पर 208.66 मीटर तक पहुंच गया था। यह नदी के निर्धारित खतरे के स्तर से काफी ऊपर था। उस समय राजधानी के कई निचले इलाकों में पानी भर गया था और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा था। वर्ष 2025 में भी यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया था।
बाढ़ सुरक्षा दीवार के अलावा सरकार ने नालों से निकाली जाने वाली गाद के निपटान के लिए तीन बायोमाइनिंग परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर लगभग 260 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में नालों की सफाई के बाद निकाली गई गाद कई बार सड़कों या नालों के किनारे छोड़ दी जाती है। बारिश होने पर यह गाद दोबारा नालों में पहुंच जाती है, जिससे उनकी जल निकासी क्षमता प्रभावित होती है।
बायोमाइनिंग परियोजनाओं के तहत गाद को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित करने और उसका उचित निपटान करने की योजना है। इससे नजफगढ़ ड्रेन सहित शहर के अन्य बड़े नालों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि केवल नालों की सफाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सफाई के बाद निकलने वाली गाद को भी व्यवस्थित तरीके से हटाना जरूरी है।
बैठक में दिल्ली के प्रमुख नालों के किनारों को बेहतर बनाने की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत कुछ स्थानों पर पैदल चलने के रास्ते, हरित क्षेत्र, पौधारोपण, रोशनी और सुरक्षा के लिए बाड़ लगाने जैसे काम किए जा सकते हैं। सरकार का उद्देश्य नालों के आसपास के उपेक्षित क्षेत्रों को अधिक स्वच्छ और सुरक्षित बनाना तथा अतिक्रमण की समस्या पर नियंत्रण करना है।
हालांकि, यमुना के किनारे कंक्रीट की दीवार बनाने के प्रस्ताव को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि बाढ़ के कारणों में नदी के बाढ़ क्षेत्र पर अतिक्रमण, निर्माण गतिविधियां और नदी की पानी ले जाने की क्षमता जैसे पहलू भी शामिल हैं। इसलिए केवल दीवार बनाने के बजाय नदी के प्राकृतिक प्रवाह और बाढ़ क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन करना जरूरी है।
दिल्ली सरकार की इन परियोजनाओं का लक्ष्य राजधानी में बाढ़ प्रबंधन और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना है। इन योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य कितनी प्रभावी तरीके से पूरा होता है और दीर्घकालीन स्तर पर नदी, नालों तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के प्रबंधन के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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