Last updated: October 27th, 2026 at 03:51 pm

बिहार की राजनीति में मोकामा के विधायक अनंत कुमार सिंह को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अनंत सिंह और उनकी पत्नी एवं पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसके बाद पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग भी उठाई है। 26 अक्टूबर को जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय पहुंचकर इस मामले में कार्रवाई की स्थिति जानने की कोशिश की। इसी बीच राज्य सरकार ने नीलम देवी को 20-सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से हटा दिया और पटना स्थित सरकारी आवास 25 नवंबर तक खाली करने का निर्देश दिया।
विवाद की मुख्य वजह बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर हुआ चुनाव है। इस चुनाव में जेडीयू ने अपने मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। वहीं, मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह के पक्ष में प्रचार किया। पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि माना। इसके बाद 24 अक्टूबर को जेडीयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से अनंत सिंह और नीलम देवी के निष्कासन का आदेश जारी किया गया।
पार्टी की ओर से जारी आदेश में आरोप लगाया गया कि अनंत सिंह ने पार्टी के निर्देशों की अनदेखी की, वरिष्ठ नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और विधान परिषद चुनाव में दूसरे दल के प्रत्याशी का समर्थन किया। इसी आधार पर उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त करते हुए छह साल के लिए निष्कासित किया गया। नीलम देवी के खिलाफ भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की गई।
जेडीयू ने अब इस विवाद को विधानसभा सदस्यता तक पहुंचा दिया है। पार्टी ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अनंत सिंह की सदस्यता पर कार्रवाई करने की मांग की है। 26 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा विधानसभा पहुंचे और पार्टी की शिकायत पर कार्रवाई की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी ने अपनी शिकायत के समर्थन में दस्तावेज और वीडियो भी प्रस्तुत किए हैं। विधानसभा सचिवालय की ओर से मामले में शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, पार्टी से निष्कासन और विधायक पद समाप्त होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। जेडीयू की मांग के बाद अनंत सिंह की विधायकी अपने आप समाप्त नहीं हो जाती। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष को संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और प्रस्तुत तथ्यों की समीक्षा करनी होगी। अंतिम निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाएगा। इसलिए फिलहाल अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने की घोषणा नहीं हुई है।
इस घटनाक्रम का असर अनंत सिंह के परिवार पर भी पड़ा है। राज्य सरकार ने उनकी पत्नी नीलम देवी को बिहार सरकार की 20-सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से हटा दिया है। इस समिति में उन्हें राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त था। इसके बाद भवन निर्माण विभाग की ओर से पटना के एक मॉल रोड स्थित सरकारी आवास को 25 नवंबर तक खाली करने का निर्देश दिया गया। इस कार्रवाई को जेडीयू से निष्कासन के बाद उनके परिवार पर पड़े प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, अनंत सिंह ने पार्टी से निकाले जाने के बाद जेडीयू नेतृत्व पर सवाल उठाए और संकेत दिया कि वह भविष्य में अपना अलग राजनीतिक संगठन बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह नीतीश कुमार का सम्मान करते हैं, लेकिन पार्टी के मौजूदा नेतृत्व से असहमत हैं। उनके बयानों से बिहार की राजनीति में इस विवाद को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
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