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पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोप, MBBS के 146 छात्र तीन महीने के लिए निलंबित

  बिहार की राजधानी पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH) में रैगिंग के आरोपों के बाद कॉलेज प्रशासन
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    बिहार की राजधानी पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH) में रैगिंग के आरोपों के बाद कॉलेज प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। नए विद्यार्थियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायतों के मामले में एमबीबीएस 2025 बैच के 146 छात्र-छात्राओं को तीन महीने के लिए कक्षाओं से निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन ने संबंधित विद्यार्थियों को छात्रावास खाली करने और कॉलेज परिसर छोड़ने का निर्देश भी दिया है। इस कार्रवाई के बाद मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मचा हुआ है और मामले की जांच जारी है।

     

    शिकायतों के अनुसार, नए दाखिला लेने वाले कुछ विद्यार्थियों के साथ वरिष्ठ छात्रों द्वारा रैगिंग किए जाने के आरोप लगे हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि जूनियर छात्राओं को देर रात छात्रावास की छत पर ले जाकर परेशान किया गया। इसके अलावा, कुछ जूनियर विद्यार्थियों को रास्ते में रोककर उनका नाम और पता पूछने तथा वरिष्ठ छात्रों के निर्देशों का पालन करने के लिए दबाव डालने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

     

    मामले की शिकायत राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC), ऑल इंडिया एंटी रैगिंग कमेटी और बिहार सरकार के लोक शिकायत विभाग तक पहुंची। शिकायतों के साथ उपलब्ध साक्ष्य भी संबंधित अधिकारियों को भेजे गए। इसके बाद कॉलेज प्रशासन से मामले पर जवाब मांगा गया और संस्थान की एंटी रैगिंग कमेटी ने घटनाक्रम की जांच शुरू की।

     

    कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. उषा कुमारी के अनुसार, एमबीबीएस 2025 बैच के 146 विद्यार्थियों को तीन महीने के लिए कक्षाओं से निलंबित किया गया है। इस कार्रवाई के कारण संबंधित विद्यार्थी जनवरी 2027 तक कक्षाओं में शामिल नहीं हो सकेंगे। प्रशासन ने उन्हें छात्रावास खाली करने का निर्देश दिया है। वर्ष 2023 और 2024 बैच के कुछ वरिष्ठ विद्यार्थियों के खिलाफ भी कार्रवाई किए जाने की खबर है। इन विद्यार्थियों को छात्रावास खाली करने और अगले आदेश तक कक्षाओं से दूर रहने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।

     

    इस मामले में एक कथित दस्तावेज भी जांच के दायरे में आया है, जिसे सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के माध्यम से जूनियर विद्यार्थियों तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई है। इस दस्तावेज को ‘रूलबुक-2026’ कहा जा रहा है। इसमें कॉलेज के प्राचार्य और कुछ शिक्षकों की तस्वीरों के साथ वरिष्ठ विद्यार्थियों को संबोधित करने और उनके सामने व्यवहार करने से जुड़े निर्देश कथित तौर पर शामिल थे। दस्तावेज में नए विद्यार्थियों के लिए कुछ नियमों को कॉलेज के आधिकारिक निर्देशों की तरह प्रस्तुत किए जाने का आरोप है।

     

    कॉलेज प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि इस दस्तावेज को किसने तैयार किया, इसे किसने प्रसारित किया और इसमें नाम दर्ज विद्यार्थियों की वास्तविक भूमिका क्या थी। दस्तावेज की सत्यता और उसके प्रसार से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए उपलब्ध साक्ष्य साइबर सेल को भी भेजे गए हैं। प्रशासन ने बिहार सरकार से भी मामले में उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

     

    कॉलेज प्रशासन के सामने अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और दोषी पाए जाने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, प्रत्येक विद्यार्थी की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों का अलग-अलग मूल्यांकन भी जरूरी है, ताकि कार्रवाई तथ्यों पर आधारित हो।

     

    रैगिंग मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। वरिष्ठता के नाम पर किसी छात्र या छात्रा को डराना, अपमानित करना या दबाव में रखना शैक्षणिक माहौल को नुकसान पहुंचाता है। इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने छात्रावासों की निगरानी बढ़ाने और वार्डनों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। नए विद्यार्थियों से रैगिंग में शामिल नहीं होने संबंधी घोषणा-पत्र लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

     

    NMCH में इस मामले की जांच जारी है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और संबंधित अधिकारियों की आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि मेडिकल संस्थानों में रैगिंग रोकने के लिए शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, सुरक्षित शिकायत व्यवस्था और विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी है।

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