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मॉक पार्लियामेंट में मीरा कुमार जिस कुर्सी पर बैठीं, वह किसकी थी? पवन खेड़ा ने बताया नेहरू से जुड़ा दिलचस्प किस्सा

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने मॉक पार्लियामेंट से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स
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कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने मॉक पार्लियामेंट से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उस कुर्सी की तस्वीर पोस्ट की, जिस पर शनिवार को पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार बैठकर मॉक पार्लियामेंट की अध्यक्षता कर रही थीं। पवन खेड़ा के मुताबिक, यह वही कुर्सी है जिस पर कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बैठा करते थे।

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    ‘नेहरू जी की विरासत को संजोए है यह कुर्सी’

     

    पवन खेड़ा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित सार्वजनिक महाभियोग की कार्यवाही के दौरान मीरा कुमार जिस कुर्सी पर बैठी थीं, उस पर कभी जवाहरलाल नेहरू बैठते थे। उन्होंने नेहरू को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का परदादा भी बताया।

    खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान नेहरू इसी कुर्सी पर बैठते थे। इस कुर्सी ने देश के कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसलों को देखा है और अपने साथ उस विरासत को संजोए हुए है।

    उन्होंने आगे कहा कि इसी कुर्सी पर बैठकर मीरा कुमार ने नेहरू की भावना को याद करते हुए ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहने के लिए अयोग्य घोषित किया। खेड़ा ने दावा किया कि जनता ने ज्ञानेश कुमार को नकार दिया है और अब उनके पद से जाने में कुछ ही समय बचा है।

    खड़गे के आवास पर आयोजित हुई मॉक पार्लियामेंट

    दरअसल, 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस की महारैली से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग की कार्यवाही का प्रतीकात्मक मंच तैयार किया गया।

    इस कार्यक्रम में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, तेजस्वी यादव समेत विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सभी नेताओं ने बारी-बारी से अपनी बात रखी। कार्यक्रम के अंत में राहुल गांधी ने भी संबोधन दिया। इसके बाद मॉक पार्लियामेंट में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।

    यह पूरी कार्यवाही विपक्ष की ओर से आयोजित एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम था। इसका प्रस्ताव अपने आप में संवैधानिक महाभियोग या मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की आधिकारिक प्रक्रिया नहीं है।

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