Last updated: November 1st, 2026 at 03:13 pm

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी INDIA गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ बड़ी रैली आयोजित की। इस रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कई अन्य विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाए। रैली के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
रैली से पहले INDIA गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के मिंटो रोड-राजीव चौक जंक्शन से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला। इस मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य विपक्षी दलों के समर्थक शामिल हुए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और इससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ और ‘वोट चोरी बंद करो’ जैसे संदेश लिखे पोस्टर और बैनर दिखाई दिए।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रैली को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का काम किया है। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी रैली में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित बदलावों के जरिए महिलाओं, युवाओं और दलितों के वोट प्रभावित हो सकते हैं। खड़गे ने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पद पर बने रहेंगे, विपक्ष अपना विरोध जारी रखेगा। उन्होंने इस आंदोलन को लोकतंत्र और नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा से जुड़ा बताया।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। अखिलेश ने कहा कि पहले भाजपा को इस प्रक्रिया से अपने समर्थकों के नाम प्रभावित होने की चिंता नहीं थी, लेकिन अब उसे भी इस मुद्दे की गंभीरता समझ में आ रही है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की आवाज उठने के बाद सत्तारूढ़ दल को भी मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों का एहसास हुआ है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी केंद्र सरकार और भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी व्यक्ति को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। ममता ने विपक्षी दलों से एकजुट होकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील की। रैली में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, राजद नेता तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं की मौजूदगी ने इसे राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक आयोजन बना दिया।
इस रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR रहा। चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूची को अद्यतन करने और उसमें दोहराव या अपात्र प्रविष्टियों को हटाने की नियमित कवायद बताता है। आयोग का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हों, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। दूसरी ओर विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और कई योग्य मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। इस तरह SIR को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद लगातार तेज हो रहा है।
रैली को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। रामलीला मैदान और मार्च के रास्ते पर हजारों पुलिसकर्मियों तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने मध्य दिल्ली के कई इलाकों में यातायात प्रतिबंध और रूट डायवर्जन भी लागू किए, जिससे वाहन चालकों को कुछ मार्गों पर परेशानी का सामना करना पड़ा।
भाजपा ने विपक्ष की इस रैली पर पलटवार किया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव आयोग पर दबाव बनाने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहा है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने रैली को अराजकता फैलाने की कोशिश बताया। भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा रहा है।
रामलीला मैदान की यह रैली ऐसे समय हुई है, जब SIR और कथित वोट चोरी का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख बहस बन चुका है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का आंदोलन बता रहा है, जबकि भाजपा और चुनाव आयोग विपक्ष के आरोपों से सहमत नहीं हैं। आने वाले समय में यह विवाद संसद, अदालतों और चुनावी राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकता है।
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