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NIA की तीन राज्यों में बड़ी रेड, झारखंड के दो घरों से लैपटॉप-प्रिंटर जब्त; बांग्लादेशी करेंसी भी मिली

सीमा पार से भारत में जाली नोटों की तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा
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सीमा पार से भारत में जाली नोटों की तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा अभियान चलाया है। बुधवार को एजेंसी की टीमों ने झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में एक साथ आठ संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान झारखंड के हजारीबाग में दो घरों की तलाशी ली गई। करीब सात घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में लैपटॉप, प्रिंटर, संदिग्ध दस्तावेज और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। वहीं, पूछताछ के लिए परिवार के एक सदस्य को भी टीम अपने साथ ले गई।

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    जानकारी के मुताबिक, पटना से पहुंची NIA की सात सदस्यीय टीम ने बुधवार सुबह करीब आठ बजे हजारीबाग के शहीद सुभाष बारला रोड स्थित बाबा पथ, हुरहुरू में तलाशी अभियान शुरू किया। यहां उदय साव और प्रदीप साव के आवासों की जांच की गई। अधिकारियों ने घर के अलग-अलग हिस्सों की तलाशी ली और कई अहम दस्तावेजों के साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने कब्जे में लिए।

    NIA की यह कार्रवाई केवल झारखंड तक सीमित नहीं रही। एजेंसी ने बिहार के गया में तीन औरंगाबाद में दो तथा पश्चिम बंगाल के मालदा में एक संदिग्ध ठिकाने पर भी छापेमारी की। तीनों राज्यों में चलाए गए इस अभियान के दौरान डिजिटल उपकरणों और संदिग्ध कागजात के अलावा बांग्लादेशी मुद्रा भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

    दरअसल, जांच का संबंध बिहार के औरंगाबाद जिले में जाली भारतीय नोटों की बरामदगी से है। मदनपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने 2 लाख 48 हजार 500 रुपये मूल्य के नकली नोट पकड़े थे। इस मामले में 15 अगस्त 2026 को मदनपुर थाने में कांड संख्या 317/2026 दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में सुरेंद्र कुमार, विजय यादव, रंजन और हजारीबाग निवासी प्रदीप साव उर्फ प्रदीप कुमार साव के नाम शामिल हैं।

    मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से संभावित संबंधों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर NIA ने 18 अक्टूबर 2026 को जांच अपने हाथ में ले ली थी। इसके बाद से एजेंसी इस नेटवर्क के संदिग्ध सदस्यों, उनके आपसी संपर्कों और जाली नोटों की सप्लाई से जुड़े ठिकानों की जांच कर रही है।

    अब तीन राज्यों में एक साथ हुई छापेमारी के बाद जांच एजेंसी को कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जब्त किए गए उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही इस कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पूरी कार्यप्रणाली और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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