Last updated: November 5th, 2026 at 01:26 pm

झारखंड में नक्सली गतिविधियों को लेकर पुलिस मुख्यालय ने राज्यभर में अलर्ट जारी किया है। प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन की ओर से नवंबर महीने में लगातार तीन सप्ताह तक अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी को संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया है। आशंका जताई गई है कि इन कार्यक्रमों के दौरान नक्सली अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, माओवादी संगठन नवंबर में तीन अलग-अलग सप्ताह मनाने की तैयारी में है। इनमें 8 से 15 नवंबर तक खूनी क्रांति सप्ताह, 16 से 22 नवंबर तक दमन विरोधी सप्ताह और 24 से 30 नवंबर तक शहीद सप्ताह शामिल है। पुलिस को आशंका है कि संगठन की कमजोर स्थिति के बावजूद इन कार्यक्रमों के दौरान किसी अप्रिय घटना को अंजाम दिया जा सकता है।
इस संबंध में झारखंड पुलिस मुख्यालय की ओर से विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। रांची, जमशेदपुर और धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षकों के साथ राज्य के सभी जिलों के एसपी, झारखंड जगुआर और रेल पुलिस को अलर्ट रहने को कहा गया है। अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
रेलवे और सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर विशेष जोर
पुलिस मुख्यालय ने रेलवे संपत्तियों को संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया है। रेलवे ट्रैक, स्टेशन, साइडिंग, रेलगाड़ियों और महत्वपूर्ण रेल लाइनों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पुल-पुलिया और रेलवे से जुड़े अन्य संस्थानों पर भी निगरानी रखने को कहा गया है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के लिए जिला पुलिस और रेल पुलिस के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया गया है।
सुरक्षा बलों के कैंप, थाने, पुलिस पिकेट और सीआरपीएफ कैंप को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। सरकारी कार्यालयों, प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों, बैंकों, वित्तीय संस्थानों और वन विभाग के प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की समीक्षा करने को कहा गया है।
मोबाइल टावर और कोयला खदानों पर भी नजर
नक्सली गतिविधियों की आशंका को देखते हुए पुलिस ने दूरदराज के इलाकों में लगे मोबाइल बीटीएस टावरों की सुरक्षा पर भी ध्यान देने को कहा है। इसके अलावा कोल साइडिंग, कोल डंप, माइंस और अन्य खनन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने को कहा गया है।
सुरक्षा बलों की आवाजाही में बरतनी होगी सावधानी
पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा बलों को एक खास खतरे के प्रति आगाह किया है। निर्देश में आशंका जताई गई है कि नक्सली पहले छोटी घटनाओं को अंजाम देकर पुलिस को मौके पर बुलाने की कोशिश कर सकते हैं और बाद में सुरक्षा बलों को निशाना बना सकते हैं। ऐसे में किसी भी घटना की सूचना मिलने पर बिना सत्यापन के जवानों को घटनास्थल पर नहीं भेजने की हिदायत दी गई है।
इसके साथ ही निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन करने, जवानों की नियमित ब्रीफिंग कराने और खुफिया सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान सुनिश्चित करने को कहा गया है। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि नवंबर के तीनों निर्धारित सप्ताह के दौरान किसी भी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
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