Last updated: November 5th, 2026 at 02:16 pm

उत्तर प्रदेश के बरेली मंडल में सरकारी मुफ्त राशन योजना का लाभ लेने वाले लाखों परिवारों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में आ गए हैं। केंद्र सरकार के राशन कार्ड मैनेजमेंट सिस्टम (RCMS) से लाभार्थियों के आंकड़ों का मिलान करने पर मंडल के चार जिलों में कुल 3,31,283 राशन कार्ड धारक संदिग्ध पाए गए हैं। इन सभी के रिकॉर्ड का सत्यापन शुरू कर दिया गया है। जांच में अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों के राशन कार्ड निरस्त किए जा सकते हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी खाद्यान्न का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना और गलत तरीके से योजना का लाभ लेने वालों की पहचान करना है।
यह मामला केवल बरेली जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बरेली मंडल के चार जिलों से जुड़ा हुआ है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार बरेली में 1,22,550, बदायूं में 99,672, शाहजहांपुर में 90,117 और पीलीभीत में 59,995 राशन कार्ड धारक संदिग्ध सूची में शामिल किए गए हैं। इन आंकड़ों के आधार पर पूर्ति विभाग ने तहसीलवार सूची तैयार कर संबंधित पूर्ति निरीक्षकों को सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी है।
जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह के अनुसार, राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से लाभार्थियों के रिकॉर्ड का मिलान किया गया है। इस प्रक्रिया में कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनकी पात्रता पर संदेह है। मंडल में अब तक 10,362 रिकॉर्ड की जांच की जा चुकी है। इनमें से 9,646 लोगों को शुरुआती जांच में अपात्र पाया गया है। हालांकि, इनकी अंतिम स्थिति सक्षम अधिकारियों द्वारा सत्यापन रिपोर्ट की पुष्टि के बाद ही तय होगी। जिन लोगों के अपात्र होने की पुष्टि होगी, उनके राशन कार्ड निरस्त किए जा सकते हैं।
विभागीय जांच में ऐसे कई संकेतकों को आधार बनाया गया है, जिनसे यह पता लगाया जा सके कि कोई परिवार वास्तव में मुफ्त राशन पाने की पात्रता रखता है या नहीं। इनमें आयकरदाता होना, सरकारी नौकरी में कार्यरत होना, चार पहिया या व्यावसायिक वाहन का मालिक होना, निर्धारित सीमा से अधिक कृषि भूमि का स्वामित्व और कंपनी का निदेशक होना जैसे मानक शामिल हैं। इसके अलावा ऐसे लाभार्थियों के रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं, जिन्होंने पिछले छह या बारह महीनों से राशन नहीं लिया है।
एक ही व्यक्ति के नाम पर एक से अधिक राशन कार्ड, आधार कार्ड में गलत जानकारी, मृत व्यक्तियों के नाम पर जारी राशन कार्ड और ऐसे परिवार जिनमें केवल 18 वर्ष से कम उम्र के सदस्य दर्ज हैं, भी जांच के दायरे में हैं। कुछ मामलों में सौ वर्ष से अधिक उम्र के लाभार्थियों और लंबे समय से निष्क्रिय पड़े कार्डों की भी जांच की जा रही है। विभाग इन सभी रिकॉर्ड का मिलान उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से कर रहा है।
बहेड़ी, रिछा और शेरगढ़ क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान हुई है। इन इलाकों में करीब 17 हजार राशन कार्ड धारक जांच के दायरे में हैं। वहीं मीरगंज क्षेत्र में लगभग 3,100 संदिग्ध कार्ड सामने आए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ऑनलाइन सूची उपलब्ध होने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है। पूर्ति निरीक्षक लाभार्थियों के दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर रहे हैं।
इससे पहले वर्ष 2024-25 में भी आयकर और परिवहन विभाग के आंकड़ों का मिलान करके राशन कार्ड लाभार्थियों की जांच की गई थी। उस समय करीब 42 हजार लोगों को संदिग्ध पाया गया था। सत्यापन के बाद लगभग 40 हजार लोगों को अपात्र घोषित कर उनके राशन कार्ड निरस्त किए गए थे। इस बार जांच का दायरा बढ़ाते हुए 24 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर लाभार्थियों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है।
सरकार की मुफ्त राशन योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। ऐसे में अपात्र लोगों द्वारा योजना का लाभ लेने से वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी सहायता पहुंचने में बाधा आती है। प्रशासन का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया में किसी पात्र परिवार का राशन कार्ड केवल संदेह के आधार पर निरस्त नहीं किया जाएगा। पहले दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध जानकारियों की जांच होगी, उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बरेली मंडल के चारों जिलों में सत्यापन अभियान जारी है। आने वाले दिनों में जांच पूरी होने के बाद अपात्र लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार राशन कार्ड निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
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