Last updated: November 5th, 2026 at 02:18 pm

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में ऑनलाइन गेमिंग और फर्जी दस्तावेजों के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। भुता थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से करीब 4.97 लाख रुपये नकद, छह तोला सोने के बिस्किट, 20 मोबाइल फोन और बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में पुलिस को 60 बैंक खातों की जानकारी मिली है। इनमें से पांच खातों के माध्यम से पिछले तीन वर्षों में करीब 25 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन होने की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल कॉइन के नाम पर लोगों को अधिक मुनाफा कमाने का लालच देता था। आरोपी फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड का इस्तेमाल करके अपनी पहचान छिपाते थे। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल फोन और बैंक खातों के माध्यम से ऑनलाइन गतिविधियां संचालित करते थे। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों से जुड़े हुए हैं।
एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा ने बताया कि भुता थाना पुलिस क्षेत्र में गश्त और चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम खटेली से अटकोना पुलिया की ओर जाने वाले रास्ते पर कुछ संदिग्ध लोग मौजूद हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ब्रजेश, हरीश सिंह, सुमेर, आकाश, विपुल कुमार सिंह और पिंटू के रूप में हुई है। सभी आरोपी ग्राम खटेली के निवासी बताए गए हैं।
तलाशी के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से 4,97,800 रुपये नकद और छह तोला सोने के बिस्किट मिले। इसके अलावा 20 मोबाइल फोन, 25 बैंक पासबुक, 30 चेकबुक, 44 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, पांच पैन कार्ड, सात आधार कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस, एक वोटर आईडी और दो बैंक स्टेटमेंट बरामद किए गए। पुलिस ने एक थंब स्कैनर, एक एमक्यूआर मशीन और जमीन से जुड़े 18 दस्तावेज भी जब्त किए हैं। बरामद सात आधार कार्ड में से तीन को कूटरचित बताया गया है।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे फर्जी पहचान पत्रों के माध्यम से अलग-अलग बैंक खाते और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते थे। ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए लोगों को मुनाफे का लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल किया जाता था। गिरोह के सदस्य क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल कॉइन के माध्यम से भी रकम प्राप्त करते थे। इसके बाद विभिन्न ऐप और माध्यमों से रकम को भारतीय रुपये में बदलने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी।
पुलिस जांच में इस नेटवर्क के कथित संचालक के रूप में दिल्ली के करावल नगर निवासी धीरज तोमर उर्फ जितेंद्र का नाम सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी उसके संपर्क में थे और उसे रुपये भेजते थे। बदले में नेटवर्क के माध्यम से उन्हें डिजिटल कॉइन उपलब्ध कराए जाते थे। इन कॉइन का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों को आकर्षित करने और कथित तौर पर ठगी के नेटवर्क को आगे बढ़ाने में किया जाता था।
एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा के अनुसार, पुलिस को अब तक करीब 60 बैंक खातों की जानकारी मिली है। इनमें से पांच खातों में पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग 25 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। जांच एजेंसी को इन लेनदेन पर संदेह है और इनके वास्तविक स्रोत तथा लाभार्थियों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस ने करीब 10 लाख रुपये की राशि को होल्ड भी कराया है। कुछ बैंक खातों को पहले अन्य राज्यों की पुलिस द्वारा संदिग्ध गतिविधियों के कारण फ्रीज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इनके मोबाइल फोन, बैंकिंग दस्तावेजों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही है। साथ ही, गिरोह के अन्य सदस्यों और कथित मुख्य संचालक की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
बरेली पुलिस की इस कार्रवाई से ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल कॉइन के नाम पर चल रहे कथित साइबर ठगी नेटवर्क का बड़ा हिस्सा सामने आया है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में अन्य राज्यों से जुड़े लोगों और संदिग्ध बैंक खातों के बारे में भी जानकारी मिलने की संभावना है।
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