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दिल्ली में वाहन प्रतिबंधों पर पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने NCR के लोगों से मांगी माफी, बोले- बच्चों की सेहत के लिए जरूरी है सख्त कदम

  दिल्ली में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच राजधानी सरकार ने पुराने वाहनों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों
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    दिल्ली में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच राजधानी सरकार ने पुराने वाहनों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। इस फैसले के कारण दिल्ली-NCR के हजारों लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार, 5 नवंबर को NCR के निवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि सरकार समझती है कि वाहन प्रतिबंधों के कारण लोगों को असुविधा हो रही है, लेकिन बच्चों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।

     

    मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो देखने को मिले हैं, जिनमें दिल्ली की सीमाओं पर पुराने वाहनों को वापस लौटाया जा रहा है। उन्होंने NCR के लोगों से हुई परेशानी के लिए खेद जताते हुए कहा कि सरकार यह कदम अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए उठा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और नियमों का पालन करें।

     

    दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर 2026 से राजधानी में बाहर के राज्यों में पंजीकृत उन पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई है, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते। यह प्रतिबंध सरकार की शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण योजना का हिस्सा है और फिलहाल 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेगा। नियम के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत पुराने वाहन, जो निर्धारित उत्सर्जन मानकों पर खरे नहीं उतरते, राजधानी में प्रवेश नहीं कर सकते। हालांकि, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। अन्य आधिकारिक छूट प्राप्त वाहनों पर संबंधित नियम लागू होंगे।

     

    इस फैसले का सबसे अधिक असर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों से रोजाना दिल्ली आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। बड़ी संख्या में कर्मचारी, कारोबारी, छात्र और निजी वाहन चालक रोजाना NCR से दिल्ली पहुंचते हैं। प्रतिबंध लागू होने के बाद कई लोगों को वैकल्पिक परिवहन साधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। कुछ सीमावर्ती इलाकों में वाहनों की जांच के दौरान लंबी कतारें और ट्रैफिक जाम की शिकायतें भी सामने आई हैं।

     

    पर्यावरण मंत्री ने अपने बयान में पंजाब सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में पर्याप्त सफलता नहीं मिली है और इसका असर दिल्ली की हवा पर भी पड़ रहा है। सिरसा ने दावा किया कि 3 नवंबर को पंजाब में पराली जलाने की 584 घटनाएं दर्ज की गईं। उन्होंने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों का हवाला देते हुए बरनाला, बठिंडा और संगरूर में प्रदूषण के स्तर को लेकर भी सवाल उठाए। मंत्री ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार प्रदूषण के कारणों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय किसानों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।

     

    सिरसा ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप किए जा रहे हैं और राजधानी की छवि खराब करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं सुलझाया जा सकता, बल्कि इसके लिए सभी संबंधित राज्यों को मिलकर काम करना होगा।

     

    वाहन प्रतिबंधों के क्रियान्वयन को लेकर दिल्ली सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई है। अधिकारियों के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान के लिए जांच अभियान चलाया जा रहा है। 4 नवंबर को ही 10,019 वाहनों का पता लगाए जाने की जानकारी मंत्री ने साझा की। 1 नवंबर से शुरू हुई कार्रवाई के बाद अब तक ऐसे वाहनों की कुल संख्या 45,601 बताई गई है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार का कहना है कि प्रतिबंधों को लागू करने के लिए निगरानी व्यवस्था लगातार मजबूत की जा रही है।

     

    दिल्ली में प्रदूषण की समस्या हर साल सर्दियों के दौरान गंभीर रूप ले लेती है। इस दौरान वाहनों का धुआं, निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा जलाने और पराली के धुएं जैसे कई कारक मिलकर हवा की गुणवत्ता खराब करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल वाहन प्रतिबंधों से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना, निर्माण कार्यों पर निगरानी, औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय जरूरी है।

     

    मंत्री की माफी के बावजूद वाहन प्रतिबंधों को लेकर लोगों की परेशानी कम होने की संभावना तभी है, जब सरकार वैकल्पिक परिवहन सुविधाओं और स्पष्ट दिशा-निर्देशों को भी मजबूत करे। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ NCR के रोजाना यात्रियों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाती है।

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