Last updated: November 5th, 2026 at 02:41 pm

बिहार की राजधानी पटना के शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NBCC (इंडिया लिमिटेड) के साथ चार बड़ी पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए समझौता किया है। इन परियोजनाओं पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इनके तहत 3,331 आवासीय फ्लैट, बिहार का पहला IT टेक पार्क और आधुनिक व्यावसायिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजनाओं का उद्देश्य सरकारी जमीन का बेहतर उपयोग करने के साथ राजधानी में आवास, रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
NBCC और बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के बीच इन परियोजनाओं को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव, शहरी विकास एवं आवास मंत्री नितिन मिश्रा तथा NBCC के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक केपी महादेवस्वामी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कंपनी ने 4 नवंबर को जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।
पहले चरण में कुल चार परियोजनाओं को शामिल किया गया है। इनमें दो आवासीय पुनर्विकास योजनाएं बिहार राज्य आवास बोर्ड की सेक्टर-5 स्थित टीवी टावर कॉलोनी और सेक्टर-6 स्थित बहादुरपुर कॉलोनी में विकसित की जाएंगी। इन दोनों स्थानों पर अलग-अलग आय वर्ग के लोगों के लिए कुल 3,331 फ्लैट बनाए जाएंगे। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG), मध्यम आय वर्ग (MIG) और उच्च आय वर्ग (HIG) के लिए आवास उपलब्ध कराने की योजना है।
प्रस्तावित आवासीय परिसरों में केवल फ्लैट ही नहीं होंगे, बल्कि आधुनिक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इनमें शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, क्लब हाउस, जिम, सामुदायिक सुविधाएं, कार्यालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल होंगी। इसका उद्देश्य पुरानी सरकारी आवासीय कॉलोनियों को आधुनिक और व्यवस्थित आवासीय परिसरों में बदलना है। इससे स्थानीय निवासियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
तीसरी परियोजना पटना के गर्दनीबाग में बिहार के पहले आधुनिक IT टेक पार्क के निर्माण से जुड़ी है। इसे बिहार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के लिए विकसित किया जाएगा। टेक पार्क में IT कंपनियों, स्टार्टअप और तकनीकी सेवाओं से जुड़ी संस्थाओं के लिए आधुनिक कार्यस्थल उपलब्ध कराने की योजना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में निजी निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वर्तमान में तकनीकी क्षेत्र में रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में युवाओं को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है। टेक पार्क के विकसित होने से इस प्रवृत्ति को कम करने में मदद मिल सकती है।
चौथी परियोजना बेली रोड स्थित जल संसाधन विभाग की जमीन पर होटल और व्यावसायिक स्थान विकसित करने से संबंधित है। इस क्षेत्र में आधुनिक व्यावसायिक सुविधाएं तैयार होने से पटना में होटल, कारोबार और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की संभावना है। राजधानी में सरकारी और निजी कार्यालयों, व्यावसायिक गतिविधियों तथा आवागमन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
NBCC के अनुसार, चारों परियोजनाएं लगभग 34.34 एकड़ जमीन पर विकसित की जाएंगी। इनकी अनुमानित लागत 2,000 करोड़ रुपये है, जिसमें GST शामिल नहीं है। कंपनी ने बताया कि परियोजनाओं से बिक्री और लीज के माध्यम से लगभग 5,152 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले चरण की परियोजनाएं स्व-वित्तपोषण मॉडल पर विकसित की जाएंगी। यानी इनके लिए बिहार सरकार को सीधे बजट से धन उपलब्ध कराने की आवश्यकता नहीं होगी। परियोजनाओं से प्राप्त होने वाली आय का उपयोग इनके विकास और लागत की भरपाई के लिए किया जाएगा।
रोजगार के लिहाज से भी इन योजनाओं को महत्वपूर्ण बताया गया है। NBCC का अनुमान है कि निर्माण के दौरान लगभग 7,500 प्रत्यक्ष और 11,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। परियोजनाएं पूरी होने के बाद IT टेक पार्क, आवासीय परिसरों, होटल और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार मिलेगा। कंपनी ने चारों परियोजनाओं से कुल मिलाकर लगभग 40,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान जताया है। हालांकि, यह कंपनी का अनुमान है और वास्तविक रोजगार परियोजनाओं के निर्माण तथा संचालन के दौरान सामने आएगा।
इन परियोजनाओं को हरित भवन निर्माण के सिद्धांतों के अनुसार विकसित करने की भी योजना है। इनमें सौर ऊर्जा, ऊर्जा बचाने वाली लाइटिंग और उपकरण, वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, अपशिष्ट जल का उपचार और हरित क्षेत्र जैसी सुविधाएं शामिल की जा सकती हैं। NBCC के अनुसार, अन्य विभागों की कुछ परियोजनाओं को लेकर दूसरे चरण की तैयारी भी चल रही है।
पटना में इन योजनाओं का वास्तविक असर उनके समय पर पूरा होने और घोषित सुविधाओं के प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगा। यदि परियोजनाएं तय गुणवत्ता और समयसीमा के अनुसार पूरी होती हैं, तो राजधानी को आधुनिक आवासीय परिसर, नया IT केंद्र और बेहतर व्यावसायिक आधारभूत ढांचा मिल सकता है। इससे बिहार में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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