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बिहार शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 10 जिलों के DEO और 9 DPO बदले; 35 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी के बीच कार्रवाई

    बिहार के शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आने
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    बिहार के शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। विभाग ने राज्य के 10 जिलों से जुड़े जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और नौ जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) की जिम्मेदारियां बदल दी हैं। इस बदलाव में पटना, भागलपुर, सीवान, नवादा, सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण सहित कई जिलों के अधिकारी शामिल हैं। शिक्षा विभाग में यह बदलाव वरिष्ठ IAS अधिकारी सीके अनिल के अपर मुख्य सचिव का पद संभालने के बाद हुआ है।

     

    विभाग की ओर से 6 नवंबर को जारी आदेश के तहत बिहार शिक्षा सेवा के अधिकारियों को प्रशासनिक दृष्टिकोण से अगले आदेश तक नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस फेरबदल में सरस्वती कुमारी को पटना का नया जिला शिक्षा पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। अब तक पटना के DEO रहे योगेश कुमार को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) में भेजा गया है। इसी तरह पूर्वी चंपारण के DEO राजन कुमार गिरि और नवादा के DEO दीपक कुमार को भी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

     

    सीवान के जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह को शिक्षा विभाग के मुख्यालय स्थित योजना एवं अनुश्रवण कोषांग में सहायक निदेशक बनाया गया है। उनकी जगह सीतामढ़ी के जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी को सीवान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में उप सचिव के पद पर कार्यरत मुकेश कुमार को भागलपुर का नया DEO नियुक्त किया गया है।

     

    इसके अलावा दिनेश कुमार पासवान को सीतामढ़ी, प्रफुल्ल कुमार मिश्रा को पूर्वी चंपारण और सुभाष कुमार को नवादा का जिला शिक्षा पदाधिकारी बनाया गया है। इन बदलावों के साथ जिला स्तर पर शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को नई जगह पर योगदान देने का निर्देश दिया है।

     

    DEO के अलावा नौ जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों का भी तबादला किया गया है। इसके तहत गोपालगंज के विनय कुमार सुमन को खगड़िया भेजा गया है। गया के आनंद कुमार को मुंगेर, नालंदा के विकास कुमार डीएन को औरंगाबाद तथा सीवान के सैयद तारिक सज्जाद को मधेपुरा में नई जिम्मेदारी दी गई है।

     

    इसी क्रम में बक्सर के रजनीश कुमार झा को भागलपुर, नालंदा के भोला कुमार कर्ण को गोपालगंज और सीवान के कुमार अभिजीत को पूर्वी चंपारण भेजा गया है। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत सूरज कुमार झा और रवि कुमार को बक्सर में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।

     

    यह प्रशासनिक फेरबदल ऐसे समय हुआ है, जब बिहार शिक्षा विभाग में वेतन, मकान किराया भत्ता (HRA) और बकाया राशि के भुगतान में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। विभाग के आंतरिक ऑडिट में राज्य के सभी 38 जिलों में 7,202 संदिग्ध मामलों का पता चला है। इन मामलों में कुल 35 करोड़ 27 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त निकासी सामने आई है।

     

    जांच के मुताबिक, HRMS यानी ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से कुछ कर्मचारियों के वेतन, मकान किराया भत्ते और बकाया राशि के नाम पर निर्धारित रकम से अधिक भुगतान किया गया। विभाग की रिपोर्ट में कुल 35,27,49,333 रुपये की राशि को संदिग्ध और वसूली योग्य बताया गया है। इनमें से लगभग 33 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है, जबकि करीब 2.24 करोड़ रुपये की राशि अभी भी बकाया बताई गई है।

     

    इस मामले में शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। अधिकारियों से सात दिनों के भीतर बिंदुवार जवाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। विभाग का आरोप है कि HRMS पोर्टल पर भुगतान की प्रक्रिया में शामिल मेकर, चेकर और अप्रूवर स्तर पर गड़बड़ी हुई। इन प्रक्रियाओं की निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की थी।

     

    शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि अनियमित भुगतान के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। विभाग इस मामले में 15 नवंबर को समीक्षा बैठक करने की तैयारी कर रहा है। बैठक में ऑनलाइन भुगतान प्रणाली की खामियों को दूर करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर चर्चा होगी।

     

     

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